श्वेता, हिनका सं मिलू... अपन दरभंगे के छथिन्ह। ई कहि राजीव जी विस्तार सं हमर परिचय देबय लगलाह। हम दूनू हाथ जोड़ि नमस्कार क श्वेता के जन्मदिनक शुभकामना देलौं आ अपना संग लाएल गिफ्ट हुनका थमा देलौं। राजीव जी हमरा दूनू के अकेला मे बातचीत करय के मौका देबय लेल खाना-पीना के तैयारी देखय के नाम पर ओतय सं चलि गेलाह। बर्थडे विश के बाद आब की गप्प कएल जाए- दूनू गोटे के जेना किछु फुराइए नै रहल छल। बस एक-दोसर के देखैत, मुस्कुरा रहल छलौं। मोन मे होए छल जे ई कहिएन्हि त ओ कहिएन्हि, मुदा शब्द जेना गुम भ गेल छल। जिनका सं मिलए लेल ओतेक तैयारी- सामने अएलि त एकदम सं बोलती बंद! जेना-जेना लोक सभ के हमरा बारे मे पता चलय लगलन्हि, खुसुर-पुसुर शुरू भ गेल। सभ गोटे के नजर हमरा आ श्वेता पर। मुदा हम त जेना ओहि ठाम के लोक, देश-दुनिया सं बेखबर, बस श्वेता मे गुम। ओहि बीच श्वेता के नजर शेखर पर पड़ल। हाए शेखर, केहन छी अहां? की सभ भ रहल छै? शेखर सं गप्प करैत देख, राजीव जी हमरा अपन आओर रिश्तेदार, गाम-घर के लोक सभ सं मिलाबय लगलाह। लोक सभ सं परिचय होएत रहल, गप्प-सप्प चलैत रहल। मुदा बीच-बीच मे नजर अपने-आप श्वेता दिस चलि जाइत छल...
हेलो मिथिला - मिथिलाक गप मैथिली मे