अथ श्री-श्री 108 स्वामी अनचिन्हारानन्द विरचित कलन्किया कथा
ई व्यंग पूर्णतः काल्पनिक अछि। एकर पात्र , घटना वा परिस्थितिसँ कोनो लेना-देना नै अछि। जँ कोनो पात्र वा घटना किनकोसँ मिलैत छन्हि तँ एकरा मात्र संयोग बूझल जाए। एहि अपीलकेँ बाबजूदो जँ केओ एहि व्यंगक घटनाकेँ

Comments
Post a Comment