हमर विआह-5
फोटो देखला के बाद मोन मे श्वेता सं भेंट करबाक इच्छा एतेक प्रबल भ गेल जे बुझाए, काल्हि मिलबाक बात छोड़ि, आइए मिल लेल जाए। मुदा मोन मे संकोच सेहो छल- लोक सभ की कहताह, बाबूजी के पता चलतन्हि त की सोचताह? मोन मे दस तरहक विचार घूमए लागल। किछु नै फुराइत छल।
सोचैत रहलौं—जन्मदिन पर जाएल जाए की नै? एकदम सं कन्फ्यूज भ गेलहुं। एहन उहापोह मे कहिओ नै रहलहुं। एक मोन कहए जे बाबूजी सं पूछि लेल जाए, दोसर मोन कहए- एतबा छोट गप्प लेल हुनका किएक परेशान कएल जाए।
इहै सोच मे डूबल रही कि जन्मदिन सं एक दिन पहिने श्वेता जीक भाय, राजीव जी के फोन आबि गेल। ओ आग्रह कैलाह-अहां जरूर आबू। देखू, रिश्ता-नाता तं ऊपर वाला के बनाएल होइत अछि। होबए के होएत तं होएत, नै होबए के होएत तं नै होएत। एहि लेल परेशान नै होउ। अहां आउ, घर-परिवार के लोक सं मिलू, मेलजोल बढ़य। एहि सं हमरा खुशी मिलत। रिश्ता नै सही, मैथिल आ बिरादरी सं होए के कारण तं मिलु। अपन इलाका, अपन मैथिल- गाम-घर सं बाहर एक-दोसर सं संपर्क होबए के चाही।
राजीव जी के बात सुनि मिलबाक उत्साह आओर बढ़ि गेल। मोन पक्का क लेलहुं- जे होए, देखल जाए। ई तय करला के बाद जाए केर तैयारी करय लागलहुं। बेर-बेर जा क फोटो देखैत, अपन सुधि-बुधि बिसरैत रहलहुं। जवानी मे एहन सपना के बारे मे सोचनाए, ओह... कतेक नीक लगैत अछि!
सभ सं पहिने ऑफिस मे फोन क छुट्टी लेलहुं। फेर गिफ्ट खरीदनाए, सैलून-पार्लर जा क बाल ठीक करनाए, कपड़ा-लत्ता ठीक करनाए—सभ तैयारी मे लागि गेलहुं। जन्मदिन नै, बुझू जेना बिआहे भ रहल हो। ई करूं त लागए- ओ छूटि गेल, ओ करूं त ई छूटि गेल। जेना-जेना समय नजदीक आबैत गेल, धड़कन तेज होएत गेल। कतेको लोक सं मिललहुं- नेता, मंत्री, अफसर, लड़का-लड़की, मुदा आइ के धड़कन त लोहरबाक धौंकनी जकां चलि रहल छल।
शेखर लाल के फोन क कहलहुं—तू चल, तों त श्वेता के जानए छ। हमरा अकेले जाए के हिम्मत नै भ रहल छ। शेखर शुरू मे टालए के कोशिश कैलाह, मुदा हमर जिद के आगां तैयार भ गेलाह।
जन्मदिनक पार्टी दिल्ली के गुलमोहर पार्क क्लब में राखल गेल छल। पार्टी सांझ साढ़े सात बजे सं छल। शेखर सं तय भेल जे साढ़े सात बजे चलब आ आठ बजे तक पार्टी मे पहुंचब। हम सभ समय पर निकललहुं, मुदा गाड़ी के ओहि दिन खराब होबए के छल। क्लब पहुंचैत-पहुंचैत नौ बाजि गेल। ओ सभ त मानि चुकल छलाह जे हम सभ नै आयब। हमरा सभ के इंतजार मे ओ सभ केक काटय मे देरी सेहो कएने छलाह। खैर, जे होए, ईश्वर जे करय छथिन्ह, नीके करय छथिन्ह।
पार्टी स्थल पर हमर पहुंचनाए आ केक के कटनाए—दूनू एके संग भेल। गार्ड के दरवाजा खोलला के बाद हम आ शेखर गेट के भीतर घुसलहुं। भीतर घुसतहि थाप्पड़ि के जोरदार गूंज के संग स्वागत भेल। मुदा ओ हमरा लेल नहि छल। ओ केक काटय के कारण बाजल छल। ओहि के संग आबय लागल "हैप्पी बर्थडे टू यू" केर आवाज।
सामने टेबल पर श्वेता अपन दफ्तरक संगी, सहेली आ दिल्ली मे रहय वाला मैथिल परिवारक लोक सभ सं घीरल छलीह। गेट के भीतर घुसय काल ओ केक काटय लेल टेबल पर झुकल छलीह। हैप्पी बर्थडे के गूंज के बीच केक के एकटा टुकड़ा ल अपन मुखड़ा ऊपर उठएलीह कि सामने हमरा पर नजर पड़लन्हि। हमरा पर नजर पड़िते एक मिनट ठिठकलीह। फेर मुस्किया क केक भाय के मुंह मे राखि देलीह।
ओ एकटक हमरा देखय लगलीह, आ हम हुनका। श्वेता के देखिते हम कोनो दोसर दुनिया मे चलि गेलहुं। लोक सभ देवी, अप्सरा, मेनका के सुन्दरता के जिक्र करैत छथिन्ह, मुदा हमरा लेल त ओ साक्षात स्वर्ग सं धरती पर उतरि आएल छलीह। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, प्रेस, मीटिंग-सैकड़ों लड़की देखलहुं, मुदा श्वेता के चेहरा पर जे आभा, जे लाली, ओकर वर्णन करनाए मुश्किल अछि। एकटा अलगे लालिमा लेने। ओहि पर खुलल, रेशम सन चमकैत बाल। हल्का आसमानी साड़ी हुनकर सुंदरता पर चारि चांद लगा रहल छल।
केक खिलाबैत श्वेता के नजर अपना पर नहि पाबि, राजीव जी देखलखिन्ह जे हिनकर ध्यान किम्हर छैनि। राजीव जीक नजर हमरा पर पड़लन्हि कि ओ खुशी सं उछलि पड़लाह, हमरा दिस झटकारैत अएलाह, दूनू हाथ जोड़ि नमस्कार केलाह—अहांक इंतजार भ रहल छल। एहि लेल केक काटय मे विलंब सेहो भेल। एक बेर त लागल जे अहां नै आयब। ई कहि ओ हमरा श्वेता के पास ल गेलाह।
सोचैत रहलौं—जन्मदिन पर जाएल जाए की नै? एकदम सं कन्फ्यूज भ गेलहुं। एहन उहापोह मे कहिओ नै रहलहुं। एक मोन कहए जे बाबूजी सं पूछि लेल जाए, दोसर मोन कहए- एतबा छोट गप्प लेल हुनका किएक परेशान कएल जाए।
इहै सोच मे डूबल रही कि जन्मदिन सं एक दिन पहिने श्वेता जीक भाय, राजीव जी के फोन आबि गेल। ओ आग्रह कैलाह-अहां जरूर आबू। देखू, रिश्ता-नाता तं ऊपर वाला के बनाएल होइत अछि। होबए के होएत तं होएत, नै होबए के होएत तं नै होएत। एहि लेल परेशान नै होउ। अहां आउ, घर-परिवार के लोक सं मिलू, मेलजोल बढ़य। एहि सं हमरा खुशी मिलत। रिश्ता नै सही, मैथिल आ बिरादरी सं होए के कारण तं मिलु। अपन इलाका, अपन मैथिल- गाम-घर सं बाहर एक-दोसर सं संपर्क होबए के चाही।
राजीव जी के बात सुनि मिलबाक उत्साह आओर बढ़ि गेल। मोन पक्का क लेलहुं- जे होए, देखल जाए। ई तय करला के बाद जाए केर तैयारी करय लागलहुं। बेर-बेर जा क फोटो देखैत, अपन सुधि-बुधि बिसरैत रहलहुं। जवानी मे एहन सपना के बारे मे सोचनाए, ओह... कतेक नीक लगैत अछि!
सभ सं पहिने ऑफिस मे फोन क छुट्टी लेलहुं। फेर गिफ्ट खरीदनाए, सैलून-पार्लर जा क बाल ठीक करनाए, कपड़ा-लत्ता ठीक करनाए—सभ तैयारी मे लागि गेलहुं। जन्मदिन नै, बुझू जेना बिआहे भ रहल हो। ई करूं त लागए- ओ छूटि गेल, ओ करूं त ई छूटि गेल। जेना-जेना समय नजदीक आबैत गेल, धड़कन तेज होएत गेल। कतेको लोक सं मिललहुं- नेता, मंत्री, अफसर, लड़का-लड़की, मुदा आइ के धड़कन त लोहरबाक धौंकनी जकां चलि रहल छल।
शेखर लाल के फोन क कहलहुं—तू चल, तों त श्वेता के जानए छ। हमरा अकेले जाए के हिम्मत नै भ रहल छ। शेखर शुरू मे टालए के कोशिश कैलाह, मुदा हमर जिद के आगां तैयार भ गेलाह।
जन्मदिनक पार्टी दिल्ली के गुलमोहर पार्क क्लब में राखल गेल छल। पार्टी सांझ साढ़े सात बजे सं छल। शेखर सं तय भेल जे साढ़े सात बजे चलब आ आठ बजे तक पार्टी मे पहुंचब। हम सभ समय पर निकललहुं, मुदा गाड़ी के ओहि दिन खराब होबए के छल। क्लब पहुंचैत-पहुंचैत नौ बाजि गेल। ओ सभ त मानि चुकल छलाह जे हम सभ नै आयब। हमरा सभ के इंतजार मे ओ सभ केक काटय मे देरी सेहो कएने छलाह। खैर, जे होए, ईश्वर जे करय छथिन्ह, नीके करय छथिन्ह।
पार्टी स्थल पर हमर पहुंचनाए आ केक के कटनाए—दूनू एके संग भेल। गार्ड के दरवाजा खोलला के बाद हम आ शेखर गेट के भीतर घुसलहुं। भीतर घुसतहि थाप्पड़ि के जोरदार गूंज के संग स्वागत भेल। मुदा ओ हमरा लेल नहि छल। ओ केक काटय के कारण बाजल छल। ओहि के संग आबय लागल "हैप्पी बर्थडे टू यू" केर आवाज।
सामने टेबल पर श्वेता अपन दफ्तरक संगी, सहेली आ दिल्ली मे रहय वाला मैथिल परिवारक लोक सभ सं घीरल छलीह। गेट के भीतर घुसय काल ओ केक काटय लेल टेबल पर झुकल छलीह। हैप्पी बर्थडे के गूंज के बीच केक के एकटा टुकड़ा ल अपन मुखड़ा ऊपर उठएलीह कि सामने हमरा पर नजर पड़लन्हि। हमरा पर नजर पड़िते एक मिनट ठिठकलीह। फेर मुस्किया क केक भाय के मुंह मे राखि देलीह।
ओ एकटक हमरा देखय लगलीह, आ हम हुनका। श्वेता के देखिते हम कोनो दोसर दुनिया मे चलि गेलहुं। लोक सभ देवी, अप्सरा, मेनका के सुन्दरता के जिक्र करैत छथिन्ह, मुदा हमरा लेल त ओ साक्षात स्वर्ग सं धरती पर उतरि आएल छलीह। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, प्रेस, मीटिंग-सैकड़ों लड़की देखलहुं, मुदा श्वेता के चेहरा पर जे आभा, जे लाली, ओकर वर्णन करनाए मुश्किल अछि। एकटा अलगे लालिमा लेने। ओहि पर खुलल, रेशम सन चमकैत बाल। हल्का आसमानी साड़ी हुनकर सुंदरता पर चारि चांद लगा रहल छल।
केक खिलाबैत श्वेता के नजर अपना पर नहि पाबि, राजीव जी देखलखिन्ह जे हिनकर ध्यान किम्हर छैनि। राजीव जीक नजर हमरा पर पड़लन्हि कि ओ खुशी सं उछलि पड़लाह, हमरा दिस झटकारैत अएलाह, दूनू हाथ जोड़ि नमस्कार केलाह—अहांक इंतजार भ रहल छल। एहि लेल केक काटय मे विलंब सेहो भेल। एक बेर त लागल जे अहां नै आयब। ई कहि ओ हमरा श्वेता के पास ल गेलाह।
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bahut badiya janaabb
ReplyDeletehttp://sanjaykuamr.blogspot.com/
shukriya Sanjay jee... ehina apan vichaar raakhi utsaah barhabait rahiyau...
ReplyDeleteMAA PURANDEVI HOMOEO CLINIC
ReplyDeleteNEAR JANTA CHAUK,(PURNEA)
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BAHUT BADHIYAN LAGAL,BAHUT-BAHUT BADHIYAN