हमर विआह-6
श्वेता, हिनका सं मिलू... अपन दरभंगे के छथिन्ह। ई कहि राजीव जी विस्तार सं हमर परिचय देबय लगलाह। हम दूनू हाथ जोड़ि नमस्कार क श्वेता के जन्मदिनक शुभकामना देलौं आ अपना संग लाएल गिफ्ट हुनका थमा देलौं।
राजीव जी हमरा दूनू के अकेला मे बातचीत करय के मौका देबय लेल खाना-पीना के तैयारी देखय के नाम पर ओतय सं चलि गेलाह। बर्थडे विश के बाद आब की गप्प कएल जाए- दूनू गोटे के जेना किछु फुराइए नै रहल छल। बस एक-दोसर के देखैत, मुस्कुरा रहल छलौं। मोन मे होए छल जे ई कहिएन्हि त ओ कहिएन्हि, मुदा शब्द जेना गुम भ गेल छल। जिनका सं मिलए लेल ओतेक तैयारी- सामने अएलि त एकदम सं बोलती बंद!
जेना-जेना लोक सभ के हमरा बारे मे पता चलय लगलन्हि, खुसुर-पुसुर शुरू भ गेल। सभ गोटे के नजर हमरा आ श्वेता पर। मुदा हम त जेना ओहि ठाम के लोक, देश-दुनिया सं बेखबर, बस श्वेता मे गुम। ओहि बीच श्वेता के नजर शेखर पर पड़ल। हाए शेखर, केहन छी अहां? की सभ भ रहल छै? शेखर सं गप्प करैत देख, राजीव जी हमरा अपन आओर रिश्तेदार, गाम-घर के लोक सभ सं मिलाबय लगलाह।
लोक सभ सं परिचय होएत रहल, गप्प-सप्प चलैत रहल। मुदा बीच-बीच मे नजर अपने-आप श्वेता दिस चलि जाइत छल। आ बुझाइत रहल जे ओहो कनखी सं बीच-बीच मे हमरा देखि रहल छथिन्ह। श्वेता के सहेली सभ सं सेहो गप्प भेल-काम-काज, पढ़ाइ-लिखाइ, दिल्ली के जिनगी, आओर दस तरहक बात।
हमरा त लागल जेना एहि बर्थडे पार्टी मे श्वेता सं बेसि चर्चा में हमहीं आबि गेल छी। ई हमर भ्रमो भ सकैत अछि, किएक त पार्टी में आएल लोक सभ हुनकर जान-पहचान के छलन्हि। एकटा हमहीं टा अनजान। कोन गाम के छी? बाबूजी के नाम? की काज करैत छी?—दस तरहक सवाल। मुदा हमर ध्यान त श्वेता पर टिकल।
शेखर सं एकटा बात पूछय के बहाने फेर श्वेता के पास पहुंचलौं आ शेखर के दोसर लोक सं बात करय लेल भेज देलौं। शेखर गेलाह त श्वेता के दू-चारि संगी सभ आबि गेलीह। धीरे-धीरे हमहुं खुलय लगलौं—हंसी-मजाक आ खुलि क गप सेहो होए लागल।
हॉबी, खनाए-पीनाए, घुमनाए-फिरनाए, पढ़ाइ-लिखाइ, काम-काज- नै जाने कोन-कोन विषय पर गप्प भेल। फोन नंबर, ईमेल के आदान-प्रदान सेहो भ गेल।
एतबा मे राजीव जी आबि श्वेता के कहलाह—गप्पे होएत रहतै या हिनका किछु खिएबो-पिएबो करबहुं?
ई सुनि श्वेता हमरा डिनर एरिया दिस ल गेलीह। खाए-पिए के नीक इंतजाम छल। वेज-नॉनवेज दूनू, आ माछ त खास मिथिलाक लोक लेल। रसगुल्ला आ मिठाई सेहो प्रचुर मात्रा मे राखल गेल छल।
खाना खा क जखन गीत-गजल के कार्यक्रम दिस बढ़लौं, त एकटा बच्चा आबि श्वेता के कहलक—अल्का दीदी आबि गेलीह। ई सुनिते श्वेता एक्सक्यूज मी कहि दीदी सं मिलय लेल डिनर एरिया सं मेन एरिया दिस चलि गेलीह।
हमहुं दोसर लड़की सभ सं गप करैत धीरे-धीरे ओतहि पहुंचलौं। श्वेता अपन दीदी के गोर लागि गला मिलि रहल छलीह। गला मिलैत अल्का जीक नजर हमरा पर पड़लन्हि। ओ श्वेता के अलग करैत, हमरा दिस दौड़ि क आबि कसि क भरि पांज पकड़ि चिहकलखिन्ह—हितेन, तुम!
ई देखिते सभ लोक सन्न। पार्टी में एकदम सन्नाटा छा गेल।
राजीव जी हमरा दूनू के अकेला मे बातचीत करय के मौका देबय लेल खाना-पीना के तैयारी देखय के नाम पर ओतय सं चलि गेलाह। बर्थडे विश के बाद आब की गप्प कएल जाए- दूनू गोटे के जेना किछु फुराइए नै रहल छल। बस एक-दोसर के देखैत, मुस्कुरा रहल छलौं। मोन मे होए छल जे ई कहिएन्हि त ओ कहिएन्हि, मुदा शब्द जेना गुम भ गेल छल। जिनका सं मिलए लेल ओतेक तैयारी- सामने अएलि त एकदम सं बोलती बंद!
जेना-जेना लोक सभ के हमरा बारे मे पता चलय लगलन्हि, खुसुर-पुसुर शुरू भ गेल। सभ गोटे के नजर हमरा आ श्वेता पर। मुदा हम त जेना ओहि ठाम के लोक, देश-दुनिया सं बेखबर, बस श्वेता मे गुम। ओहि बीच श्वेता के नजर शेखर पर पड़ल। हाए शेखर, केहन छी अहां? की सभ भ रहल छै? शेखर सं गप्प करैत देख, राजीव जी हमरा अपन आओर रिश्तेदार, गाम-घर के लोक सभ सं मिलाबय लगलाह।
लोक सभ सं परिचय होएत रहल, गप्प-सप्प चलैत रहल। मुदा बीच-बीच मे नजर अपने-आप श्वेता दिस चलि जाइत छल। आ बुझाइत रहल जे ओहो कनखी सं बीच-बीच मे हमरा देखि रहल छथिन्ह। श्वेता के सहेली सभ सं सेहो गप्प भेल-काम-काज, पढ़ाइ-लिखाइ, दिल्ली के जिनगी, आओर दस तरहक बात।
हमरा त लागल जेना एहि बर्थडे पार्टी मे श्वेता सं बेसि चर्चा में हमहीं आबि गेल छी। ई हमर भ्रमो भ सकैत अछि, किएक त पार्टी में आएल लोक सभ हुनकर जान-पहचान के छलन्हि। एकटा हमहीं टा अनजान। कोन गाम के छी? बाबूजी के नाम? की काज करैत छी?—दस तरहक सवाल। मुदा हमर ध्यान त श्वेता पर टिकल।
शेखर सं एकटा बात पूछय के बहाने फेर श्वेता के पास पहुंचलौं आ शेखर के दोसर लोक सं बात करय लेल भेज देलौं। शेखर गेलाह त श्वेता के दू-चारि संगी सभ आबि गेलीह। धीरे-धीरे हमहुं खुलय लगलौं—हंसी-मजाक आ खुलि क गप सेहो होए लागल।
हॉबी, खनाए-पीनाए, घुमनाए-फिरनाए, पढ़ाइ-लिखाइ, काम-काज- नै जाने कोन-कोन विषय पर गप्प भेल। फोन नंबर, ईमेल के आदान-प्रदान सेहो भ गेल।
एतबा मे राजीव जी आबि श्वेता के कहलाह—गप्पे होएत रहतै या हिनका किछु खिएबो-पिएबो करबहुं?
ई सुनि श्वेता हमरा डिनर एरिया दिस ल गेलीह। खाए-पिए के नीक इंतजाम छल। वेज-नॉनवेज दूनू, आ माछ त खास मिथिलाक लोक लेल। रसगुल्ला आ मिठाई सेहो प्रचुर मात्रा मे राखल गेल छल।
खाना खा क जखन गीत-गजल के कार्यक्रम दिस बढ़लौं, त एकटा बच्चा आबि श्वेता के कहलक—अल्का दीदी आबि गेलीह। ई सुनिते श्वेता एक्सक्यूज मी कहि दीदी सं मिलय लेल डिनर एरिया सं मेन एरिया दिस चलि गेलीह।
हमहुं दोसर लड़की सभ सं गप करैत धीरे-धीरे ओतहि पहुंचलौं। श्वेता अपन दीदी के गोर लागि गला मिलि रहल छलीह। गला मिलैत अल्का जीक नजर हमरा पर पड़लन्हि। ओ श्वेता के अलग करैत, हमरा दिस दौड़ि क आबि कसि क भरि पांज पकड़ि चिहकलखिन्ह—हितेन, तुम!
ई देखिते सभ लोक सन्न। पार्टी में एकदम सन्नाटा छा गेल।
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Kahani Dumdar ba...
ReplyDeletehasan.roohani@gmail.com
Kya bat hai sir ji kya twist diya hai kahani mai....Woh bhi romantic...Wah wah wah...Maza aya gaya padh kar...!!!
ReplyDeleteNoor Khan
Dhanyawad Hasan aur Noor Bhai...
ReplyDeletevisualisation or presentation k jawab nhn...
ReplyDeleteHasan Jawed
Nik lagal....
ReplyDeleteKumar Kali Bhushan
Mumbai-Keoti