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मैथिली विरोधी !!

  बिहारक चुनाव जँ जँ लग आयल जा रहल अछि सरगर्मी बढी रहल अछि ......कथिक सरगर्मी से तs हम आ समूचा देशक लोक बूझि रहल छथि. नेतागण आरोप प्रत्यारोप एक दोसर पर तेना लगा रहल छथि जेना आशीर्वाद  हो . लेखा जोखा भs रहल अछि मुदा अपन कार्यक नहि....दोसर नेता की नहि केलाह ताहि केर . जनता केर बुझाबय के प्रयास में कोनो तरहक कोताही कियैक छोड़ताह . सूतल नेता सब जागि गेलाह अछि . अपन भरि कार्यकाल मद में मस्त छलथि, बटोरय सs फुर्सत कहाँ छलैन्ह जे ओ सब जनताक सुख दुःख के विषय में सोचितथि.


आब जाहि पर नोन मिरचाई छिरकने छलाह ताहि लहरि केर कम करबाक प्रयास केनाई तs उचिते. जाहि प्रमंडल केर नाम मात्र उगाही करबाक प्रयोजन के लेल भेल होयतैंह ताहि ठाम जा अपन उपस्थिति दर्ज तs करबे करताह..... आ.. वाह रे जनता.

 आजु कतहु हम पढ़य छलहुँ जे कोनो कांग्रेसी नेताक बयान छलैन्ह "नितीश जी मैथिली विरोधी छथि .......चुनाव लग आबि देखि नितीश जी के मैथिली आ विद्यापति याद आबि गेलैन्ह. यदि ई नहि तs मैथिली के सिलेबस सs कियैक हटेलाह". हम ओहि नेता सँ सहमति छी..... नितीश जी मैथिली विरोधी छथि ......ओ मात्र चुनाव लग देखि इ सब देखेबाक लेल कs रहल छथि ........जनता केर अपना पक्ष में करबाक लेल कs रहल छथि. मुदा ओ कांग्रेसी नेता की इ बिसरि गेलाह जे आजु मैथिली भाषाक इ दशा ख़ास कs बिहार में कियैक छैक ? काग्रेसी नेता के जँ मैथिली सँ प्रेम रहितियेंह तs आजु मैथिली बिहारक द्वितीय भाषा रहितियैक . मुदा ओहि समय में मुख्यमंत्री जी वोट लेल मैथिली केर बलि देने छलाह आ आजु नितीश जी के वोटक लेल मैथिली आ विद्यापति के याद आबि गेलैन्ह तs एहि में कोन पैघ गप्प भs गेलैक.

मैथिली आ विद्यापति जहिना नितीश जी के लेल हथियार छैन्ह तहिना ओहि समय में पदासीन मुख्यमंत्री जी के लेल छलैन्ह आ जे मंत्री आजु नितीश जी पर आरोप लगा रहल छथि हुनको लेल . सब अपन अपन स्वार्थ मात्र के लेल . चाहे ओ नितीश जी होइथ वा कोनो आओर नेता ........चाहे ओ हुनका मैथिली सs प्रेम होउक वा नहि होउक ताहि सs की .

मुदा इ सोचनीय विषय अवशय अछि जे लुप्त भेल जारहल एहि समृद्ध भाषा केर कोना बचायल जाय? जाहि भाषा आ विद्वानक प्रतिष्ठा सौंसे अछि जाहि भाषाक अपन व्याकरण अछि अपन इतिहास अछि ओकरा कोना बचायल जाय ? की हमारा लोकनिक कोनो कर्त्तव्य नहि.......मात्र नेता के कोसैत रहि आ हाथ पर हाथ धरि बैसल रहि ?

लुप्त कहला पर किछु लोक केर आपत्ति होयतैंह ......इ हम जानैत छी ....मुदा हमारा हिसाबे मैथिली लुप्त प्राय जेना छैक. कियैक नहि ओकरा अष्ठम सूची में स्थान भेट गेल हो .



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Comments

  1. kusum ji, aapne bilkul sahi likha haiaakhir hamaara bhi farj banta hai desh ,samaaj, sahity ,bhashha me apne yogdaan dene ke liye.
    bahut achhi prastuti----
    poonam

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