जकर डर छल, सेहे भेल। पार्टी मे आएल किछु महिला सभ लेल त जेना मुंह मांगल मुराद पूरा भ गेलन्हि। गाम-घर के माए-बहिन सभ के जखन शहरक कोनो मसाला मिलि जाए छनि, त ओकरा चटकारा ल क सुनाबए मे कोनो कसर नहि छोड़ै छथिन्ह। पार्टी खत्म भेल, मुदा कानाफूसी शुरू भ गेल। मामला दिल्ली सं वाया रिश्तेदारी गाम तक पहुंचि गेल। सभ ठाम गप्प के केंद्र बनि गेल अल्का के हमरा सं चिपैट जनाए। अगर ई चिपटनाए कॉलेज मे भेल रहैत, त आम बात रहैत। मुदा मिथिलाक समाज मे, गाम-घर के लोक के बीच, ओहो मे एकटा विआहल महिला के—ई बात सभक लेल हजम करनाए कठिन छल। एक सं दोसरा, दोसरा सं तेसरा—बात फैलैत-फैलैत हमर गाम तक पहुंचि गेल। मां-बाबूजी के कान मे सेहो पड़ि गेल। पंडित जी के कान मे सेहो। मां-बाबूजी जतबा चिंतित, पंडितजी ओतबा उत्साहित। ओ सीधा हमर घर पहुंचि गेलाह, आ अपन पक्ष राखए लगलाह—हमरा प्रति लोक के भड़काबय के जतेक कोशिश होएत अछि, सब करय लगलाह। मुदा बाबूजी संयमित स्वर मे पंडित जी से कहलखिन्ह- एक त हमर बेटा चिपटल नहि, दोसर ओ लड़की विआहल छथीह, नीक परिवार के छथीह, आओर दिल्ली मे पढ़ि-लिखि क अमेरिका मे रहय छथीह। जतए गला मिलनाए साधारण बात छी। दून...
bibhash
ReplyDeleteI lisen Hello Mithila Programe.
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my name is Bibhash chandra mishra
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