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नञि बनि पाएत मिथिला राज्य

बिहार के मिथिला इलाका मे आई काल्हि मिथिला राज्य निर्माण रथ घूमि रहल अछि. अलग मिथिला राज्य बनाबए के लेल...लोक के जागरूक करय लेल ई रथ निकालल गेल अछि.

एक जून के पुनौराधाम सं शुरू भेल ई रथ यात्रा 10 जून के सहरसा मे खत्म होएत. मिथिला राज्य निर्माण के लेल आंदोलन  सं जुड़ल लोक के कहनाए छनि जे मिथिला के संग भेदभाव भ रहल अछि.

सात करोड़ मैथिली बाजय वाला इलाका होए के बादहुं मिथिला के अलग राज्य नहि बनाएल गेल अछि जखन कि संविधान तक मे जनसंख्या के आधार पर
राज्य बनाबए के बात कहल गेल अछि.

रथ निकालय वाला लोक के इहो कहनाए छनि जे एहि सं मिथिलाक प्राचीन गौरवशाली संस्कृति के खत्म होए के संकट पैदा भ गेल अछि. बिना अलग राज्य बनने मिथिलाक विकास नञि होएत.

मुदा सवाल अछि जे मिथिला राज्य बनत की? किएक बनय मिथिला राज्य? कि राज्य बनला पर मिथिला सेहो झारखंड जकां अराजकता के हाल मे नञि पहुंचि जाएत?

कि मिथिला मे कोनो एहन नेता...लीडर अछि जिनका पूरा इलाका मे मान्यता छनि? कोनो एहन नेता छथिन्ह जिनका एक इशारा पर पूरा मिथिला उठि ठाड़ भ जाए?

कोनो एहन नेता छथिन्ह जे सच मे मिथिला के विकास के रास्ता पर ल जाए मे सक्षम छथिन्ह? कि राज ठाकरे जैसन कोनो लीडर अछि जे मैथिली-मिथिला के लेल सरकार के चुनौती द सकय?

केना बनत मिथिला?

अहां खुद सोचिऔ...पूरा मिथिला मे कोनो ऑफिस...दोकान...स्टेशन...बस स्टैंड मे मैथिली मे लिखल किछ मिलैत अछि अहां के? कि अहां के पूरा इलाका मे कतहुं... कोनो पोस्टर- बैनर मैथिली मे लिखल मिलैत अछि.

कि मिथिला मे बच्चा के प्राइमरी स्कूल मे मैथिली पढ़य लेल मिलय छनि? कि कोनो स्कूल-कॉलेज मे मैथिली अनिवार्य अछि? मन अछि तं पढूं नहि तं कोनो बात नञि.

आखिर बच्चा सभ मैथिली पढ़बो किएक करताह...ई रोजगार सं तं जुड़ल नञि अछि. पढ़ि क कोन फायदा... जखन रोजगार- नौकरी नञि मिलत.

मैथिली मे कइटा पेपर...चैनल निकलैत अछि? आंगुर पर गिनय लायक अखबार...पत्रिका अछि आओर चललौं अ अलग राज्य बनाबए. सोचिऔ.

मैथिली मे लsद क एकटा सौभाग्य मिथिला चैनल अछि. अछि तं मैथिली चैनल मुदा बेसि प्रोग्राम दोसर भाषा मे देखय लेल मिलत.

दरभंगा से मिथिला आवाज अखबार निकलय के शुरू भेल अछि. धन्य सीएम झा जी जे एहि अखबार के निकलालखिन्ह. मुदा कतेक दिन चलत तकर ठिकान नहि.

ईश्वर सं तं इहे प्रार्थना जे कम सं कम ई अखबार चलय नञि तं फेर कोनो दोसर आदमी मैथिली मे अखबार निकालय के हिम्मत नञि करताह.

लोक सभ मैथिली के जगह हिंदी अखबार खरीद पढ़य छथिन्ह. एकर एक कारण हमरा जकां लोक के मैथिली पढ़य-लिखय
नञि अनाए सेहो अछि.

जखन मैथिली मे पढ़ाई नहि होएत तखन पढ़य आएत केना आओर अखबार खरीद पाई बरबाद किएक करब. एहन मे मैथिली मे केना कोनो अखबार-पत्रिका निकलत.

दोसर बात ई जे अलग राज्य बनत तं किनका मुख्यमंत्री बनैबन्हि. कीर्ति झा आजाद... शकील अहमद... हुकुमदेब नारायण यादव... अली अशरफ फातमी जैसन नेता के...जे अखन धरि इलाका के विकास लेल किछ नहि करि सकलाह.

अखन मिथिलाक कोनो एहन नेता नहि छथिन्ह जे नरेन्द्र मोदी...रमन कुमार...शिवराज सिंह जैसन इलाका के विकास करय लायक होएताह.

अखन मिथिलाक जतेक एमपी...एमएलए छथिन्ह ओहि मे सं कोनो विकास पुरुष लायक नहि छथिन्ह.

कि अहां के लगैत अछि जे मिथिला मे कोनो एकटा एहन नेता छथिन्ह जे विकास पुरुष बनि सकय छथिन्ह आ हुनका मे ओ सामर्थ्य छनि? एना मे केना बनत मिथिला?



Comments

  1. हितेंद्र जी, हमर गाम मिथिला इलाका में य। पर दुखक बात इ कि मैथिली लिखे बाजे में हम अभागा छि। रांची में एखन मिनवास करे अछि। पहलूक बेर अहां के कोनो विषय पर लिखेक प्रयास केलों य। व्याकरणक गलती नय देखब।

    मुदा मिथिला राज्यक प्रसंग में अहां जे कहलों, सब सहमत अछि। एकदम सटीक बात। अहां के कहनाय कोनो कथन भर ना अछि। गंभीर विचार आ आत्मचिंतन के मुदा अछि। एकटा-दूटा लोगक मिथिला राज्यक गीत गबेय स कोनो परिणाम न मिल सके य। रांची के उदाहरण अछि जे वि़द्यापति समारोह अप्रैल महिना में दो-तीन दिन के होय। एकटा-दूटा मधुश्रावणी, जानकी नवमी सनक कोनो कार्यक्रम भ जाइय। बाकी बारहों माह कतो-कतो स मांग उठाबल जाइय जे मिथिला क दोसर राजभाषा के दर्जा देल जाय। एकर बातक कोनो सुनवाई मुख्यमंत्री स ल क राज्यपाल के तरफ से देखेल न मिल य। आखिर कोना? विद्यापति समारोह में, कैलेंडर विमोचन या आउर कोनो समारोह, कार्यक्रम में पुरुष टा हाजिरी देल आबे य। परिवारक लोग क कोनो कारणक नय आने य। उहो में 10 में दूटा-चार टा त आपस में हिंदी में बात करत। विद्यापति समारोह के आयोजन में सक्रिय लोकक में अधिकतर कोनो पार्टी से जुड़ल अछि। कार्यक्रम के आयोजन क्रम में अपन मनक नेता, सांसद का निमंत्रण दे छेत। मुख्य अतिथि तक बनाल जा अछि। अपन राजनीतिक जमीन तैयार करेक प्रयास होछे। राह में अपन समाज के कियो मिलत त कायदा स मैथिली में न बल्कि हिंदी में बात करत।
    समाजक कोनो लोगक एठां ब्याहक, मुुंडन कार्यक्रम हात त वहुठां ‘बफे’ सिस्टम स्टाइल। मतलब जाव, आषीर्वादी दियो, अपना तरीका से खाव, निकलू। कोनो व्यवहारक, विचारक, आवभगत के रस ना मिलत। अपना इलाका के गांवो-घर में आब भोज-भातक जगह बफे सिस्टम घुस गेल अछि। पावनक-त्योहारो के दिन जिंस-पैंट, फुलपैंट-षर्ट में नजर आत। धोती-कुर्ता, पाग आब न सम्हरे य। मेहमान घर आबेय त कोल्डड्रिंक, चाय से कोरम करल जाय य। पान, माछ, मखानक रिवाज नसीब से कतो-कतो देखे’सुनेल मिले य। मुदा जब हमहीं सब आपस में जुड़ल ना अछि, अपना भाषाक लेल स्नेह, सम्मान घेट गेल अछि त मिथिला राज्यक वास्ते जे सब प्रयास छै, ढपोरषंखी बेसी लगय य। मैथिली राज्यक मिषन एखन दूरक कौड़ी य।

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