हमर विआह -7

पार्टी में मौजूद सभ लोक एक-दोसर के मुंह ताकए लगलाह। सभ के चेहरा पर अचरज छल—ई की भ रहल अछि? खुसुर-पुसुर शुरू भ गेल। बड़-पुरान लोक सभ त सोचए लगल—कहां त हवा चलि रहल छल जे श्वेता लेल ई लड़का देखल जा रहल छै, आओर ई त...!

एम्हर अल्का जी के खुशी के ठेकान नै रहल। ओ हमरा पजिअनै हमरा आंखि मे झांकैत बोलैज जा रहल छलीह- कहां चलि गेल छलौं अहां? एकदमे सं बिसैर गेलौं अहां? हम अहां के कहिओ माफ नै करब... अहां सं हम बड्ड नाराज जी... मुदा जखन हुनका ई भान भेलनि जे ओ कोनो प्राइवेट जगह पर नै बल्कि पार्टी में छथिन्ह, त अपना के संभारैत, हमरा अपन पांज सं मुक्त करैत श्वेता के कहली—जानए छी! हितेन हमर कॉलेज के जमाना के बेस्ट फ्रेंड छथिन्ह।

अल्का जी अपन उत्साह मे कहए लगलीह- जखन अहांक रिश्ता के गप्प सुनलौं, त मोन मे आयल जे शायद ई ओहे हेताह, मुदा सौ प्रतिशत श्योर नै छलौं। कॉलेज के बाद एकदम सं कटि गेल छलौ, आ हम एहि बारे मे पूछताछ सेहो नै कएलौं।

अल्का हमरा आ श्वेता के पकड़ि राजीव जी लग ल गेलीह आओर कहलीह- भैया, जानए छी, हम सभ एके कॉलेज में छलहुं। हमर बेस्ट फ्रेंड... कॉलेज मे हमर सभक अलगे धाक रहए। पढ़ाई मे हमर खूब हेल्प करैत छलाह।

एकटा आओर गप्प—लोक सभ गाम-घर सं बाहर निकलि क अपन मिथिला, अपन लोक के बिसरि जाए छथिन्ह, मुदा ई एहिठामो मैथिल छात्र सभ के एकजुट रखने छलाह। हम सभ आंखि मुनि क हिनका पर भरोसा करैत छलौं। हिनका बिना हमर सभक कोनो काज नै होएत छल। पढ़ाई के संग मस्ती सेहो खूब करैत छलौं। कॉलेजक दिन के बाते किछु आओर होए छै!

अल्का बोलैत जा रहल छलीह, आ हम सभ सुनि रहल छलौं। श्वेता अचरज मे कखनो हमरा, त कखनो दीदी के देखैत जा रहल छलीह।

एम्हर शेखर लाल के सेहो सेहे हाल। हुनका नै बुझा रहल छलन्हि जे ई अएलाह श्वेता के देखए, आ बीच मे कतए सं बड़ बहिन टपकि अएलीह। अएलीहे नै ओ त भरि पांजि भरि क सार्वजनिक रूप से अपन खुशी के इजहार सेहो क देलीह। 

शेखर हमरा पकड़ि क एक कात ल गेलाह- ई की भ रहल छै... हमरा त किछु बुझाइए नै रहल अछि। हम शेखर के हंसैत कहलिए—पैघ कहानी छै... बाद मे आराम सं बतैबह। अखन बस एतेक बुझि ल जे हम सभ संगे पढ़ैत रही आ ओ हमरा सं प्यार करैत छलीह।

पार्टी धीरे-धीरे समाप्ति दिस बढ़ल। लोक सभ विदा लेबय लागलाह। हमहुं राजीव जी सं कहलिए- आब आज्ञा देल जाउ। ओ पार्टी मे अएबाक लेल आभार प्रकट कैलाह। विदा होए सं पहिने एक बेर फेर श्वेता के जन्मदिन के शुभकामना देलौं।

राजीव जी, श्वेता आ अल्का सभ गोटे हमरा बाहर तक छोड़य अएलाह। अल्का हंसैत पूछली- कि यौं, अखनो विआह के लेल मन डोलैत अछि कि नै?

हम मुस्कियाइत उहे पुरान उत्तर देलौं- ई त मां-बाबूजी पर निर्भर करै छनि। ओ जे चाहथिन्ह, सेहे होएत।

राति के खुशगवार हवा मे, पार्टी के रंग, श्वेता के मुस्कान आ अल्का के अपनापन—सभ किछु मोन मे गड़ि गेल। जिनगी के ई मोड़, जेना नवका कहानी के शुरुआत छल।

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