बिआह आ गोरलगाइ

 कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक गजेन्द्र ठाकुर
जमाय पएर छूबि कए प्रणाम कएलन्हि तं ससुर सए टाका निकालि एक टाकाक नोटक सिक्काक लेल कनियांकें सोर केलन्हि.
खूब खर्च-बर्च कएने छलाह बेटीक बियाहमे पाइ अलग गनने छलाह आ नगरक चारि कठ्टा जमीन सेहो बेटीक नामे लिखि देने छलाह.
“नई बाबूजी. ई गोर लगाइक कोन जरूरी छैक”?
तावत कनियां आबि गेल रहथिन्ह, एक टकाक सिक्का लs कए.
एक सए एक टाका जमायक हाथमे रखैत ससुर महराज बजलाह-
“राखु-राखु. ई तं पहिनहियो ने सोचितियैक”.
Share/Save/Bookmark
हमर ईमेल:-hellomithilaa@gmail.com

Comments

Popular posts from this blog

हमर विआह- 8

अहाँ मैथिली बजै छी की ?

छोट राज्य के पक्ष मे नीतीश जी

दिल्ली मे भेल मिथिला महोत्सव आओर मैथिली साहित्य महोत्सव

ट्विटर स्पेस: मिथिला राज्य निर्माण पदयात्रा पर भेल चर्चा

फेर अगुआ बनत बिहार

राष्ट्र निर्माणमे राज दरभंगाक योगदानक चर्चा दिल्ली मे

नहि रहलाह मैथिली पुत्र प्रदीप

मिथिला लेल पैघ खबर- मैथिल पुत्र विजय झा जी पंडौल मे करय जा रहल छथिन्ह 200 करोड़ के निवेश

जगदीश मंडल जी के उपन्यास 'पंगु' लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार