हमर विआह 3 ( तेसर कड़ी )

हुनकर रूप-यौवनक आभा गुलाबी साड़ी के झिलमिलाहट सं झांकि रहल छल। हम हुनकर फोटो के रूप-माधुर्य मे एतेक तल्लीन भ गेलहुं जे बुझायल, ओ साक्षात हमरा सामने ठाढ़ छथि- मुस्कियाइत, नजरि गड़ौने। जेना कहि रहल छथि- की देख रहल छी? आगू आउ। ई रस भरल लाल ठोर अहीं के लेल अछि। हमर गालक लाली, ई रूप-यौवन—सब अहीं के लेल। डरू नै, आगां बढू। हमरा अपन आलिंगन मे ल लिअ, अपन बांहि मे समेटि हमर अतृप्त यौवन के तृप्त करि दिअ। जन्म-जन्म के पिआस बुझा दिअ।

हमरो मोन मे उत्साह भरि गेल- किछु हिम्मत भेल। मन भेल जे कम से कम हुनकर चेरी सन ठोर के स्वाद त चखि लिअ। प्रेमक प्रथम निशान हुनकर खिलल अधर पर द दिअ।

हम फोटो के साक्षात हुनका बुझि चुमय लेल आगू बढ़लहुं। एतबा में फोनक घंटी बाजि उठल। तंद्रा टूटि गेल। सपना के रंगीन दुनिया सं बाहर आबि गेलहुं। दिल धड़कय लागल- जेना दिवाली के चारि दिन पहिने सं फुलाएल हुक्कालोली सलाइयक काठी देखते धधकि उठैत अछि। ओह... एहन मधुर सपना सं जगा देलक। मोन भेल जे फोन उठा जोर सं पटकि क फोड़ि दी। मुदा ओम्हर मामाजी के आवाज सुनि मन मसौसि क रहि गेलौं।

मामाजी सेहो बिआह के बात ल क फोन केएने छलाह। हुनकर गप्प सुनि तमसाएल मन किछु शांत भेल। आब विआहक बात सुनय मे नीक लागय लागल। कहय लगलाह—सरिसवपाही के वीरेन्द्र बाबू के भेजने छलीअह। मिलल होएथुन्ह। जे प्रयोजन सं ओ सभ आएल छलखिन्ह, ओकरा साकार करबाक कोशिश करिऔ। लड़की सेहो दिल्ली मे काज करय छथिन्ह। बायोडाटा सं हुनकर नंबर ल हुनका सं संपर्क करू। मेलजोल बढ़ाउ, हुनका बारे मे बेसि सं बेसि जानय के कोशिश करू। सब किछ समये पर नीक लगैत अछि।

मामाजी करीब 20-25 मिनट धरि अपन फिलॉस्फी झाड़ैत रहलाह। जखन हम लड़की सं सम्पर्क करबाक कोशिश करय लेल तैयार भेलहुं। तखन फोन धरलाह।

मामाजी के फोन रखला के बाद हम लिफाफा सं बायोडाटा निकालि, भावी जीवनसंगिनी के बारे मे जानकारी जुटाबय मे लागि गलहुं। पता चलल जे हुनकर जन्मदिनक समय त आब आबए वाला अछि। आब हमरा हुनका फोन करय के बहाना आ दिन दुनू भेट गेल। सोचलहुं- पहिल भेंट पर हुनका की गिफ्ट देल जाए, एहि पर विचार करनाए जरूरी अछि। आब हमर पूरा ध्यान एहि पर लागि गेल जे पहिल मुलाकात के केना खास बनाएल जाए आ हुनका कोन गिफ्ट देल जाए। 

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Comments

  1. मुझे आपका लेख बहुत अच्छा लगा मैं रोज़ आपका ब्लॉग पढ़ना है। आप बहुत अच्छा काम करे हो..

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