आई- काल्हि ट्रेन मे जहरखुरानी के घटना बढ़ि गेल अछि. हर हफ्ता...दस दिन पर दु- चारि टा मामला सामने आबि जा रहल अछि. जहरखुरानी मे एकटा गप्प आओर ई अछि जे एकर शिकार होए वाला बेसि लोक दिल्ली... मुम्बई... पंजाब... हरियाणा... कोलकाता सं कमा कS आबय वाला बिहारी मजदूर रहय छथिन्ह. संगहि अहां ध्यान देबय त पता चलत जे ई घटना बेसि स्लीपर आ जनरल बॉगी मे होइत अछि. दरभंगा... मधुबनी...समस्तीपुर... सहरसा... गया ... जहानाबाद के कतेक लोक जहरखुरानीके शिकार भS अपन पाई - ढौआ गवां चुकल छथिन्ह. दिल्ली रुट पर ई घटना बेसि मुगलसराय सं बिहार दिस बढ़ला पर होइत अछि. जखन कि कोलकाता वाला रास्ता मे बिहार मे घुसतहिं बढ़ि जाइत अछि. हर दु- चारि दिन पर सुनय मे आबैत अछि जे फलां स्टेशन पर किछ लोक जहरखुरानीके शिकार भSगेलखिन्ह. डिब्बा मे बेहोश पड़ल मिलला... एहि लेल आई काल्हि ट्रेन मे विशेष सावधानी बरतय के जरूरत अछि. पूजा- पाठ के नाम पर प्रसाद खिला देल जाइत अछि. वैष्णो देवी के प्रसाद त तिरुपति बालाजी के प्रसाद त कहिओ बद्रीनाथ के प्रसाद बता लोक के खिला देल जाइत अछि. आमतौर पर लोक सभ किछ मना कs दै छथिन्ह... मुदा प्रसादक नाम पर मना नहिं क पाबय छथिन्ह. जाहि कारणे सभ किछ लूटि जाइ छन्हि. खाली हाथे लूटल- पिटल घर आबय छथिन्ह. रास्ता मे चाय- पानि, ठंडा, फल- केला सभ मे बेहोशी के दवा मिलाकय बेहोश कs दैत अछि. भरि रास्ता किछ भs जाय ककरो पर विश्वास नहिं करु. चाहे ओ कतबो नीक किएक नहिं लगैथि. एकटा बात सामने आएल अछि जे जहरखुरानी वाला भरि रास्ता अपन नीक -नीक मधुर गप्प सं लोकक मन जीत लय छथिन्ह. ओकरा बाद घर नजदीक अएला सं पहिने किछ खिया -पिया कs बेहोश कs सभ किछ लs चंपत भs जाइ छथिन्ह. लोक समझय छथिन्ह जे आब त गाम दिस आबि गेलहुं आब कि चिंता... आब त घर के पास आबि गेलहुं... आब त अपन इलाका आबि गेल... ओ खिड़की...गेट पर जा बाहर देखय लगय छथिन्ह. सभ जानल पहचानल लगैत अछि. सोचय छथिन्ह छपरा आबि गेल... सोनपुर आबि गेल... समस्तीपुर आबि गेल... आओर निश्चिंत भs जाइ छथिन्ह मुदा एहि निश्चिंतता मे जहरखुरानी वाला के काज शुरू होइ छै. ओ भरि रास्ता अहां सं मिलि के हंसैत... बाजैत... खेलैत आएत. अहां के लेल चाय लाएत... पान लाएत... केला... मुंगफली लाएत... अहां जे देबय ओकरा बिना किछ कहने खा लेत... मुदा जखन अहां बिहार मे घुसला के बाद निश्चिंत होए लागब हुनकर काज शुरु होए लागय छै. ओ आ ओहि ट्रेन मे हुनकर गुट के लोक जे अनजान बनि के रहय छथिन्ह अएताह आओर कोनो नहिं कोनो बहाने किछ न किछ खिआबय के कोशिश करत. ओ खुद खयताह जाहि सं अहां के विश्वास होय मुदा ई सभसं खतरनाक क्षण होइ छै. एहि आखिरी समय मे धैर्य सं काज लेबय के रहय छै. एहि ट्रेन सफर मे अनजान लोक पर विश्वास करला सं अहांक जीवन भर के कमाए गायब भs सकय अछि. हमर गाम के एकटा लड़का कोलकाता से दोकानक लेल सामान लsक आबय छलखिन्ह. एकटा आदमी सं दोस्ती भ गेलन्हि ओहो कोलकाता सं सामान लs क आबय छलखिन्ह. बरौनी सं आगां बढ़ला पर समस्तीपुर सं पहिने हुनका कोका कोला पिला देलखिन्ह. ओ बेसुध भs गेलाह. कहय छलखिन्ह जे ओ देखय छथिन्ह जे जहरखुरानी वाला हिनकर सामान लs जा रहल अछि मुदा हिनका ओतेक होश नहिं रहैन जे ओ ओहि आदमी के विरोध करथिन्ह आ हल्ला करथिन्ह. कहय छलखिन्ह जे गला सं आवाज नहिं निकलि पाबय छल. एतेक बेसुध भs गेल छलाह. ओ अपना मे नहिं छलाह. ताहि लेल अहां सभ सेहो गाड़ी- घोड़ा मे कनि सावधानी बरतल करु. खाय- पिबय लेल संभव सकय त घरहिं सं किछ लs क निकलल करु. किछ नमकीन... बिस्किट... भुजिया... भुजा... चूड़ा... सत्तु... लिट्टी... पेड़ा... मिठाई किछुओ लs लिअ बस चौबीस घंटा के तs बात छै. बुझु आई उपवासे अछि मुदा कान पकड़ि लिअ जे दोसर के देल किछ नहिं खायब. केतबो पढ़ल- लिखल... अफसर जकां दिखय वाला लोक किएक नहिं होए... फटाफट अंग्रेजी बोलय वाला किएक नहिं होय ककरो पर विश्वास नहिं करु किएक त रेलवे सेहो कहय छै सावधानी हटल कि दुर्घटना घटल. त सतर्क रहुं. सुरक्षित रहुं. शुभ यात्रा.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
भाई पढ़ नहीं पा रहे..
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