जीतिया पावनि

मिथिलांचल में पावनि केर कोनो कमी नहिं अछि...मधुश्रावणी, बरसाइत, सामा चकेवा , चौरचन, कोजगरा, जूड़िशीतल ऐहन कतेक पावनि अई...मुदा गाम घर सं बाहर रहला पर कई बेर पता नहिं चलय छै...एहने में एकटा पावनि जितिया पिछला हफ्ता मिथिलांचल में मनाओल गेल...धार्मिक आस्थाक संगहि संग प्रकृति आओर सामाजिक रूप सं अहि पावनि केर खास महत्व अई...एहि पावनि में माय सभ अपन पुत्र...संतान के दीर्घजीवी होबय के कामना करैय छथिन्ह...एहि पावनि में मरुआ... माछ... साग... मिठाईक खास महत्व अई...नदी, पोखरक कात कथा सुनल जायत अछि...ओना जीतिया पावनि मनाबय के पाछा कथा छई जे एकटा राक्षस एकटा गाम में आतंक मचौने छल जकरा स श्रीकृष्ण जी जीमूत वाहन के रूप में अवतार लय रक्षा कएने छलथिन्ह...एहि पावनि में दिन राति सहय पड़य छै...उपवास करय पड़य छै...कहावत सेहो छै... जे जीतिया पावनि बड़ भारि...धिया पुता के ठोकि सुतलन्हि, अपने खयलन्हि भरि थारि...

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