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गुजरात मे पहिल दिन...

बिहार सं दिल्ली आओर दिल्ली सं सूरत. दिल्ली सं सूरत अएलाह हफ्ता भर भ चुकल अछि. एतेक दिन सं सभक मुंह सं गुजरात के बारे मे सुनैत रहय छलहुं. मुदा अखन धरि गुजरात आबय के मौका नहि मिलल छल. तै द्वारे एहि बेर जेनाहि गुजरात सं एकटा ऑफर आएल हम ओकरा स्वीकार करय मे देर नहि लगैलहुं.

मने-मोन कहलौं जे एहि बेर गुजरात घुमि कs आबय के चाही. किएक तं बूढ़ सभ कहि गेल छथिन्ह कि जतेक बाहर घूमब-फिरब ओतेक अनुभव हेत...ओतेक दिमाग खुलत. ओनाहुं पटना...
दिल्ली... रांची और लखनऊ के अलावा दोसर दिस गेलाह नहि पार लागल अछि. मुदा एहि बेर हम कहलौं कि नई देश भ्रमण जरूर करबाक चाही. ओनाहुं अखन बेरोजगार छलहुं.

विदा भेलहुं सूरत के लेल. ट्रेन जखने गुजरातक सीमा मे प्रवेश करलक तखने लागल कि किछु बदलाव भेल अछि. किएक तं अपना सभ के तरफ स्टेशन सभ कतेक गंदा रहैत अछि... ई कोनो कहय के बात नहि अछि. मुदा एतुका स्टेशन सभ अतेक साफ सुथरा जे मोन होएत कि एतहिं सुति रही.

रास्ता मे गोधरा सेहो आएल छल. गोधरा पहुंचला पर 2002 याद आबि गेल. बाद बाकी हमर ट्रेन राति के साढ़े दस बजे सूरत पहुंचल. राति मे सूरत स्टेशन पर संगी सभ आबि गेल छल. खेनाय नहि खएने छलहुं. ओनाहों गुजरातक खेनाय के बारे में बडड् सुनले छलहुं. मोन मे तं गुजराती खाना के स्वाद अबैत रहे. संगी सभ सेहो इहे गप कहला कि चलु गुजरात मे शुरूआत एतुका खेनाय सं कएल जाए.

हमहुं तपाक सं हं कहि देलहुं. देरी नई करवाक चाही. चौबीस घंटा सं ट्रेन में बैसल-बैसल मोन सेहो बैचेन भs गेल छल. गुजराती थाली लगाएल गेल. सभसं पहिले एक चम्मच छोला मुंह मे देलउं. मोन भेल कि तुरंत फेंक दी. मुदा अन्न रहय...कि करतौं. छोला जे रहय ओ पूरा मीठ्ठ. आई तक हम खाली मसाला वाला तीतगर...चटगर...सुसुआबैय वाला छोला खेएने छलौं. ई त हमरा लेल एकदम सं नया स्वादक अनुभव रहय.

गुजरात मे लोक खाना सभ मे मिरचाई के जगह चीनी आओर गुड़ मिलाबए छथिन्ह. मुदा आब हफ्ता भर मे हमरो आदत भ गेल अछि. त एहन रहल हमर गुजरातक पहिल दिन. गुजरात के बारे में आउरो बड़ गप अछि जेना-जेना काज सं फुरसत भेटत तेना-तेना लिखब.
आगां किस्सा जारी रहत...अहांक दिलीप झा
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हमर ईमेल:-hellomithilaa@gmail.com


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Comments

  1. भासा समझ म नहीं आवत है बाबू, शेष हमरे गुजरात मा स्वागत बा...

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  2. सही कहा आपने गुजरात में सब्‍जी में चीनी का इस्‍तेमाल करते हैं। प्‍याज लहसून नहीं के बराबर खाते हैं वहां के लोग। हमने भी 10 दिनों तक गुजरात के कुछ जगहों का भ्रमण किया है। जामनगर, राजकोट आदि। वहां जाकर वहां की संस्‍कृति देखा तब जाना कि भारत में गुजराती संस्‍कृति की पहचान क्‍यों है। अनूठी है वहां की संस्‍कृति, वो पहनावा, वो बात विचार, वो मदद की भावना, वो जागृति कम ही जगह देखने को मिलती हैं।
    बधाई हो आपको जो आपने गुजरात का भ्रमण किया।।।।।।

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  3. बधाई हो आपको आपने गुजरात का भ्रमण किया। हमने भी वहां के कुछ गांवों का भ्रमण किया है। वहां की संस्‍कृति वाकई काबिले तारीफ है। अनूठी भाषा, अनूठा पहनावा वाकई अचंभित करने वाला है।

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  4. बधाई हो आपको

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  5. Hamro Gujarat bad nik lagal...Ham 2 saal Gandhinagar me padhai kene chhi...Aanhank baat ekdam thik achhi...

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