आत्मदर्शन


Bookmark and Share
Subscribe to me on FriendFeedAdd to Technorati Favorites


ठोकलहुँ पीठ अपन अपने सँ, बूझलहुँ हम होशियार।

लेकिन सच कि एखनहुँ हम छी, बेबश आउर लाचार।

यौ मैथिल जागू करू विचार। यौ मैथिल सुनि लिय हमर पुकार।।

गाम जिला के मोह नहि छूटल, नहि बनि सकलहुँ हम मैथिल।

मंडन के खंडन केलहुँ , बिसरि गेल छी कवि-कोकिल।

कानि रहल छथि नित्य अयाची, छूटल सब व्यवहार।

बेटीक बापक रस निकालू, छथि सुन्दर कुसियार।

यौ मैथिल जागू करू विचार। यौ मैथिल सुनि लिय हमर पुकार।।

मिथिलावासी बड़ तेजस्वी, इहो बात अछि जग जाहिर।

टाँग भीचै मे अपन लोक के, एखनहुँ हम छी बड़ माहिर।

छटपट मोन करय किछु बाजी, सुनबालय क्यो नहि तैयार।

मुखिया नहि मानथि समाज मे, एक सँ एक बुधियार।

यौ मैथिल जागू करू विचार। यौ मैथिल सुनि लिय हमर पुकार।।

"संघे शक्ति कलियुगे" केर, कतेक बेर सुनलहुँ हम बात।

ढ़ंगक संघ बनल नहि एखनहुँ, हम छी बिल्कुल काते कात।

सुमन हाथ लय बिहुँसल मुँह सँ, स्वागत सत्कार।

हृदय के भीतर राति अन्हरिया, चेहरा पर भिनसार।

यौ मैथिल जागू करू विचार। यौ मैथिल सुनि लिय हमर पुकार।।

-श्यामल सुमन, जमशेदपुर



TwitIMG

Webmasters Make $$$

Comments

Popular posts from this blog

ट्विटर स्पेस: मिथिला राज्य निर्माण पदयात्रा पर भेल चर्चा

हमर विआह- 8

ट्विटर स्पेस पर रोज भs रहल अछि मिथिला-मैथिली पर सार्थक चर्चा, अहुं सभ लिअ भाग

दिल्ली मे भेल मिथिला महोत्सव आओर मैथिली साहित्य महोत्सव

प्रसिद्ध नाटककार महेंद्र मलंगिया जी भेलाह एकटा आओर सम्मान सं सम्मानित

आई सं राजनगर आओर सौराठ मे मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल

राष्ट्र निर्माणमे राज दरभंगाक योगदानक चर्चा दिल्ली मे

सौभाग्य मिथिला : मैथिलीक अपन चैनल

नहि रहलाह मैथिली पुत्र प्रदीप