अन्नकूट, पखेब,भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा

दीपावली देखल जाय त एक दिनक पावनि नहिं अछि...ई पांच दिनक पावनि अछि जे धनतेरस सं शुरू भ भाईदूज के खत्म होयत अछि...ई कातिक अन्हरिया के त्रयोदशी सं शुरू भय इजोरिया के द्वितीया तक पंच महोत्सव के रूप में मनाबय जाइत अछि...त्रयोदशी के धनतेरस, चतुर्दशी के नरक चतुर्दशी या छोटका दिवाली, अमावस्या के दिवाली, प्रतिपदा के अन्नकूट या गोवर्धन पूजा या पखेब...आओर द्वितीया के भाईदूज आओर चित्रगुप्त पूजा.
धनतेरस के भगवान धन्वन्तरि के पूजा होयत अछि..अहि दिन नबका बर्तन खरीदनाय शुभ मानय जाइत अछि...व्यापारी सभ अपन खाता बही के पूजा करैत छथिन्ह..अगिला दिन नरक चतुर्दशी के नहाय खाय के रिवाज छै...हनुमानजी के पूजा सेहो कएल जाइत अछि...हनुमान जयंती के एक दिन बाद दिवाली में दिया-बाती जलायल जाइत अछि...लक्ष्मी गणेश जी के पूजा कएल जाइत अछि...प्रतिपदा के अन्नकूट...गोवर्धन पूजा आ अपन मिथिलांचल में पखेब पूजा होयत अछि...एहि दिन लोक सभ अपन जतेक गाय, बैल, भैंस, बकरी पोसने रहय छथिन्ह... हुनका नहा-धोया क पूजा करय छथिन्ह... गला में नबका रस्सी पहनायल जाइत अछि...देह, पैर, सिंग में तेल लगाबय जाइत अछि...पैर में घुंघरु..गला में सेहो घुंघरु...कौड़ी सं बनल गरदाम पहनायल जाइत अछि...लाल, पियर..हरिहर रंग सं सजाबल जाइत अछि...गाय..बैल के रूप..सुन्दरता देखते बनैत अछि...एहि दिन कोनो काज सेहो नहिं लेल जाइत अछि...

गोवर्धन पूजा के अगिला दिन यम द्वितीया...भाई दूज आओर चित्रगुप्त पूजा होयत अछि...भाई दूज...भाई बहिनक पानवि अछि...एहि दिन मिथिला के कायस्थ परिवार के लोक सभ चित्रगुप्त पूजा करय छथिन्ह...मुदा एहि में दोसर समुदाय के लोकसभ सेहो हिस्सा लयत छथिन्ह...हम सभ सेहो कायस्थ परिवार सं नहिं भेला के बादो एहि में बढ़ि-चढ़ि के हिस्सा लैत छलहुं आओर सांस्कृतिक कार्यक्रम सभ सेहो करैय छलहुं...अहि दिन भगवान चित्रगुप्त जी के मूर्ति के साथ कलम दवातक पूजा कएल जाइत अछि...अहि दिन पढ़ाई लिखाई के काज नहिं होयत अछि.

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