दरभंगा जयनगर बड़ी लाइन बनला के बाद अखनो लोक के परेशानी कम नहिं भेल अ...ट्रेन कम भेला सं अखनो लोक के घंटों इंतजार करय पड़य छै...चारि-चारि..पांच पांच घंटा तक एको टा ट्रेन नहिं मिलैत छै...प्लेटफॉर्म पर बैठल ट्रेनक रस्ता देखैत रहुं...ओना आब कोलकाता...हाबड़ा जाई वाला एकटा आओर ट्रेन धुरियान फास्ट पैसेंजर के दरभंगा सं बढ़ा कय जयनगर तक कए देल गेल अ...मुदा धुरियान तं शुरुए सं अपन देर सं चलय के लेल बदनाम रहय अई...आ आब त एकर दूरी आओर बढि गेल... देखु कि होइछ...लोकक त बेहतरी के उम्मीद लएक चलैत छथि....ओना बड़ी लाइन के उद्घाटन के समय रेल मंत्री लालू यादव कहने छलथिन्ह जे जल्दीए गरीब रथ आओर दोसर ट्रेन के जयनगर तक क देल जाइत..मुदा जयनगर तक नहिं भेलाह सं अखनो बस..जीप टेम्पू में लटैक क यात्रा करय लेल मजबूर छथि...ट्रेन में सेहो कम बेस सेहे स्थिति रहैत अछि...चलु धुरियान सं शुरुआत भेल अ...दोसरो चलबे करत...नहिं चलय के एकटा कारण जयनगर में एखन ट्रेन लगाबय के ...देखरेख के सभ सुविधा नहिं होनाय सेहो छै...जेना जेना सुविधा उपलब्ध भेल जाइत..ट्रेनक संख्या सेहो बढ़ल जाइत...त आबय वाला दिन में बेहतरी के उम्मीद कएल जा सकय अ.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
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