इजाजत

मैं तो
चाहता था कि
गुलाब की उस
कोमल कली को
सीने से
लगाकर
पूरा खिला दूं
पूर्णता का
एहसास
करा दूं
पूनम का
चांद
बना दूं
पर मुझे क्या
मालूम था कि
माली मुझे
इसकी
इजाजत देगा
और
वो मेरे सीने से
लग पाने के
गम में
बिना खिले ही
दम तोड़ देगी

Comments

Popular posts from this blog

हमर विआह- 8

राष्ट्र निर्माणमे राज दरभंगाक योगदानक चर्चा दिल्ली मे

दिल्ली मे भेल मिथिला महोत्सव आओर मैथिली साहित्य महोत्सव

प्रसिद्ध नाटककार महेंद्र मलंगिया जी भेलाह एकटा आओर सम्मान सं सम्मानित

जगदीश मंडल जी के उपन्यास 'पंगु' लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार

अलग मिथिला राज्य केर मांग भेल तेज, देखु जंतर-मंतर प्रदर्शन केर फोटो

मिथिला लेल पैघ खबर- मैथिल पुत्र विजय झा जी पंडौल मे करय जा रहल छथिन्ह 200 करोड़ के निवेश

ट्विटर स्पेस: मिथिला राज्य निर्माण पदयात्रा पर भेल चर्चा

ट्विटर स्पेस पर रोज भs रहल अछि मिथिला-मैथिली पर सार्थक चर्चा, अहुं सभ लिअ भाग