नवका- पुरनका लेख सर्च करु...

अपन गाम

हमरा बजबैये अपन ओ गाम यौ
मनो नै भाबैये दिल्ली सन टाऊन यौ
स्कूलक पछुआर मे पाकरिक गाछ यौ
हमरा सतबैये बहिनक याद यौ
आमक गाछी के बड़का मचान यौ
गाछी मे मिलीजुलि कs पकबैत पकवान यौ,
मोन परैये परोड़क अचार यौ ,
ओझाजीक भोजन मे काकीक सचार यौ,
कहिया हम जेबै अपन ओ गाम यौ ,
मनो नै भाबैये दिल्ली सन टाऊन यौ .


BY- Anshu Mala

Bookmark and Share Subscribe to me on FriendFeed Add to Technorati Favorites


TwitIMG

3 comments:

  1. बड्ड नीक कविता।

    ReplyDelete
  2. sach me...Anshu Mala jee ekdam san gaam ke yaad dila deleeh. hum ummeed karbain je Anshu jee ehina likhait rahtheeh.
    dhanyawad

    ReplyDelete
  3. सुन्दर कविता,
    सच लिखल पढि कय लागल हमरो गाम बजा रहल.
    लिखैत रहू.
    गाम के ताजा करबैत रहू.
    बधाई.

    ReplyDelete

अहांक विचार/सुझाव...