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कि बाउ नीक छी नहिं ?

हमर गाम के बगल मे एकटा गाम अछि धेपुरा. चुनाव के समय अछि. वोट मांगय लेल एकटा नेता घुमैत-घुमैत धेपुरा गाम सेहो चलि गेलथि. टोला-टोला घुमलाह... लोक सभ के कहलथिन्ह जे हमरा वोट दिअ. हम ई कs देब...त ऊ कs देब. स्कूल खोलबा देब... बिजली लगबा देब. हाथ जोड़ि-जोड़ि सभ सं वोट देबय लेल कहथिन्ह. वोट मांगय के क्रम मे ओ दलान पर चौकी पर बैसल एकटा बुजुर्ग के पास गेलाह. बुजुर्ग अपन चश्मा ठीक करैत पूछलथिन्ह - कि बाउ केहन छी ? नीक छी नहिं ? बड़ दिन बाद देखलिअह. कतs रहय छ ? नेताजी के त किछ नहिं फुरैलन्हि. ओ बस वोट देबय के आग्रह करि... एकटा पर्चा थमा आगां बढ़ि गेलाह.
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2 comments:

  1. ये नेता जी का प्रजेंस ऑफ माइंड है...

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  2. I was wondering for your absence and yesterday I read the reasons. Once again, you have presented the grim reality of the Indian political scenario..

    Great fiction/reality.....

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