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बांध मरम्मत केर लेल 197 करोड़


कोसी नदी के कुसहा बांध केर मरम्मत के लेल 197 करोड़ रुपया मंजूर कएल गेल अछि. सरकार के अनुसार मरम्मत के काज एक हफ्ता मे शुरू भs जएबाक चाही. एहि लेल केन्द्र सरकार सं 40 करोड़ रुपआ पहिनहि मिलि चुकल अछि. मरम्मत केर काज के लेल हफ्ता दिन मे निविदा निकालि देल जाएत. ओना काज त अखनो जारी अछि मुदा ओ इंमरजेंसी के रुप मे शुरू भेल छल. आब विधिवत मरम्मत केर काज शुरू होएत. कुसहा बांध टूटला सं सहरसा... मधेपुरा... अररिया... सुपौल आओर पूर्णिया मे बाढ़ि सं भारी तबाही भेल अछि. लोक सभ अखनो फंसल छथिन्ह. बीच-बीच मे पानि भs गेलाह सं स्थिति बिगड़य के आशंका सं लोक अपन गाम... घर वापस नहिं लौटि रहल छथिन्ह. बाढ़ि सं गामक गाम बहि गेल. सड़क... रेल पटरी...पुल सभ बहि गेल. आबय जाए के सभ साधन खत्म भs गेल अछि. पानि बेसि छल तं नाव सं आबय जाय मे होय छल... राहत के काज होएत छल मुदा आब पानि कम भेलाह सं राहत सेहो कम भs गेल अछि. शिविर मे लोक सभ के राहत मिलैत अछि. जे गाम छोड़ि कs राहत शिविर मे नहिं आएल छथिन्ह ओ कनि बेसि कष्ट मे छथिन्ह. ओना राहत शिविर के हाल सेहो कोनो नीक नहिं कहल जा सकैत अछि. स्कूल... सरकारी ऑफिस...बाध- बन मे तिरपाल टांगि शिविर बना देल गेल अछि. लोक सभ केहुना रहि रहल छथिन्ह. अखनो लोक सभ के बड़ मदद केर जरूरत अछि. मिथिलाक लोक सभ के सेहो आगां आबय के जरूरत अछि. असल मे पानि कम भेलाह के बाद मदद करय वाला लोक सभ पाछां हटि गेलखिन्ह अ मुदा बाढ़ि मे फंसल लोक सभ के परेशानी कम नहिं भेल अछि. आब त दस तरहक बीमारी सभ सेहो फैलय लागल अछि. हिनका सभ के अखने बेसि मदद के जरूरत अछि.


2 comments:

  1. सब बेर जेंका एहु बेर तटबंध केर मरम्मत करा के सरकार निश्चिंत भs जैत और फेर किछु सालक बाद कोसी केर प्रकोप होयत. तटबंध और बराज कोशी नदी के नियंत्रित नै कs सकेत ऐछ. ई बात सब के बुझल छैन मुदा सब कियोक अनठेने छैथ. जे नदी विश्व में सर्वाधिक सिल्ट यानि गाद या मैट आने वाला नदी छैथि हुनका दुनु कात से १५ या २० फीट ऊच मैटक दीवार से घेर देला स कतेक दिन तक सुरक्षा भेटेत रहत. ई तs साधारण गप छैक के मैट, गाद जमा होइत रहला से तटबंध और बराज के पैन जमा करे केर क्षमता कमs होइत जेते और नदी के पेट ऊंच होइत जेते. किछु सालक बाद नदी के पेट एरोस परोस के समूचा ईलाका में सबसे ऊंच भs जेते, तटबंध और बराज के पैन जमा रखे के क्षमता नै के बराबर भs जेते और कनियो पैइन भेला से तटबंध टूटे के खतरा भs जेते और जाहिठाम तटबंध टूटते ताहि ठाम से नदी के नवका धार फूट जेते. यैह चीज अहिबेर भेल हं और येह चीज फेर होयत. तहन सवाल उठे छै जे समस्या केर कि निदान ऐछ. निदान छै और बहुत कारगर निदान छै. आय बिहार सेहो पंजाब जेंका समृद्ध राज्य रहिता यदि कोसी नदी पर नेपाल के भीतर ६० के दशक में बड़का बाँध बनाओल जैता. तटबंध तs कोसी के बाढ़ से तात्कालिक बचाव के लेल कम समय लेल बनावोल गेल छल. ओही दिन में एकर उम्र बेसी से बेसी ३० साल निर्धारित कैल गेल छल और ई बात भेल छल जे अहि तीस साल के अन्दर नेपाल के सीमा के अन्दर ( बीरपुर लग भीमनगर जत अखन बराज ऐछ ओही ठाम से ५० किलोमीटर ऊपर पहार पर ) कोसी नदी पर विशाल डैम बना लेल जै. ३० साल के कहेये जे ४० साल बीत चुकल ऐछ मगर सब कियो, हम, अहाँ, अपन सबहक एम् एल ऐ, एम् पी, सब कियोक सुतल रहलो. बड पैघ भूल भेल मगर आबो ता चेती. समस्या केर स्थाई समाधान हेबाक चाही. आब मांग उठेबाक चाहि जे, कोसी पर नेपाल के भीतर बाँध बनैल जै. चूँकि ई दोसर देश वाला बात भ जैत छे ताहि लाका इंटरनेशनल ला, के तहत, भारत सरकार के नेपाल सरकार संगे, सम्मानजनक अंतर्राष्ट्रीय समझौता करवाक चाही जैसे के नेपाल के सेहो बराबरी के फायदा होई. ई कपोल कल्पना नै छी. अगर आदमी कर चाहे ता किछो क सकेये. हमार विनम्र विचार में कोसी के प्रकोप से बचाव के येह धेर उपाय ऐछ जैसे कि, नेपाल और बिहार दुनु के अत्यधिक फायदा हेते. यदि अहि पर ढंग से काज कैल जै ता बिहार में एकटा हरित क्रांति एव जैत जैसे कि पूरा देश के फायदा होयत. तटबंध केर मरम्मत तात्कालिक आवश्यकता छै जैसे कि लोक राहत शिविर सब छोइर अपन घर वापस जा सकेत. लेकिन फेर अगला बेर, या किछु सालक बाद रहत शिविर आव परे एहेन समाधान नै चाहि. लिखे में जे त्रुटी भेल हं ताहि लेल क्षमा चाहेत अछि.

    अहींक,
    मनोरंजन कुमार झा.
    दिल्ली.

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  2. kichhu sthayi samadhan hebak chahi. pichla beruka barhik rahat ekhan dhari baki achhi.

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