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पार्टिसिपेटरी नोट- पीनोट



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शेयर बाजार के 1744 अंक गिरनाय आओर वित्तमंत्री के बयान के बाद एकर संभलनाय..बाजार संभलो करल त एक दु अंक नहिं 1400 अंक...सेंसेक्स 1744 अंक गिरला के बाद 336 अंक के गिरावट के साथ बंद भेल...बाजार में अफरातफरी मचि गेल...सभक जुबान पर बाजार के गिरय के चर्चा...सऊ ठाम एहि चर्चा की पी नोट के कारण बाजार गिरला सं कइटा निवेशक कंगाल भ गेल...आखिर ई पी नोट की छै...ई पीनोट के चक्कर दिन भरि लोक के चक्करलै रहल...
पी नोट...पुरा नाम भेल पार्टिसिपेटरी नोट...असल में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) आओर ओकर विदेशी ग्राहक के बीच होय वाला समझौता के पार्टिसिपेटरी नोट कहल जाइ छै...एकरा अहां अक तरहक बांड सेहो कहि सकय छी... आओर एकरे माध्यम सं विदेशी ग्राहक या निवेशक जे कहिऔ...ऊ विदेशी संस्थागत निवेशक के अपना लेल सौदा करल लेल कहैय छथिन्ह...मुदा एकरा में सभसं बड़का पैंच ई छै जे कि अगर कोनो सौदा होइ छै तं ओहि में ऊ विदेशी ग्राहक के नाम नहिं आबय छै..ई सौदा..खरीद बिक्री..विदेशी संस्थागत निवेशक के नाम पर होइछ...ई सौदा होइछ पार्टिसिपेटरी नोट के माध्यम सं..आओर एहि माध्यम सं खरीद-बिक्री करय वाला के पुरा पता...या जानकारी सेबी के नहिं मिल पाबैय छै...सेबी शेयर बाजार पर नजर रखय वाला नियामक छै...
त होइछ ई कि पार्टिसिपेटरी नोट के माध्यम सं खरीद बिक्री...सौदा होय पर ककरो ई पता नहिं चलि पाबैय छै कि ई सौदा के करि रहय अ...दोसर शब्द में ई कहि सकय छी जे ई एक तरहक बेनामी सौदा छै..एहि में असल निवेशक के छै ई पता नहिं लगय छै...ई विदेशी निवेशक के लेल बाजार में घुसय के चोर रस्ता छै...ई चोर रास्ता सं ओ बाजार में घुसि पैसा लगाबय छथि आओर फायदा उठा निकलि जाइत छथि...ज्यादातर ई रास्ता ओ विदेशी निवेशक चुनय छथिन्ह जे ई नहिं चाहय छथिन्ह जे हुनका बारे में कोई जानय...एकरा जरिए ऊ लोक सेहो पाई लगाबैत छथि जिनका पर सेबी खरीद बिक्री करय लेल रोक लगा देने छै...एक अनुमान के मुताबिक शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेश जतेक पैसा लागल छै ओहि मे आधा पार्टिसिपेटरी नोट के माध्यम सं छै...
आब हंगामा ई बात पर छै कि सेबी ई जानय चाहय छै जे विदेश पाई शेयर बाजार में आबि रहल छै ओ कहां सं आबि रहल छै...आओर बाजार में जे तेजी छै ओकर पीछा ककर हाथ छै....सेबी चाहय छै कि एकर जांच होय...असल में जानकार लोक के माननाय छै जे बाजार में हाल में जे तेजी आयल अ ओकर पाछा ओ विदेशी धन अई जे पार्टिसिपेटरी नोट के माध्यम सं बाजार में आयल अ...अहां कहबैय जे ठीक त छै बाजार में पाई आबि रहल छै..मुदा सोचिऔ अगर ओ विदेशी निवेशक मुनाफा कमाय के चक्कर में शेयर बेचय लागल त शेयर बाजार में भगदड़ मचि सकय अ...
एहि लेल सेबी से सख्ती जरूरी छै....देश के...सेबी के...सरकार के ई जानय के अधिकार छै जे बाजार में केहन पाई लागल अई...कहि ई कालाधन...आतंकवादी गतिविधि या दोसर गतिविधि के पाई त नहिं छै...एहि लेल सरकार के तरफ सं ई कड़ाई जरूरी छै...सरकार ई चाहय छै जे कालाधन पर रोक लगै..वित्त मंत्री ई कहबो कयलथिन्ह अ जे पार्टिसिपेटरी नोट लागू करय के मतलब विदेशी धन पर रोक लगाबय के नहिं छैन...केवल ई पक्का करय के छै जे बाजार में सही पाई आहि रहल छै कि नहिं...

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