बिहार के मिथिला मे पालिटेक्निक संस्थान... कॉलेज खोलय के लेल केंद्र सरकार सं 12-12 करोड़ रुपया देल गेल अछि. पालिटेक्निक कॉलेज मधुबनी... सीतामढ़ी... शिवहर... सुपौल... अररिया... कटिहार... पूर्वी चम्पारण... पश्चिमी चम्पारण मे खोलल जाएत. हर संस्थान के लेल शुरुआती तौर पर 12-12 करोड़ रुपया देल गेल अछि. पालिटेक्निक कॉलेज के इंफ्रास्ट्रक्चर...आधारभूत संरचना आओर दोसर चीज के इंतजाम मे एहि पाई के इस्तेमाल कएल जाएत. सरकार... प्रशासन सं एहि के लेल जरूरी इंतजाम करय के लेल कहि देल गेल अछि. एकरा लेल जमीन आओर दोसर चीज के व्यवस्था कएल जा रहल अछि. एहि सं स्थानीय स्तर पर विकास त होएबे करत...लोक के रोजगार सेहो मिलत. स्थानीय लड़का सभ के फायदा सेहो मिलतन्हि. हुनका सभ के एकटा आओर विकल्प मिलतन्हि पढ़ाई-लिखाई के लेल. ई नीक कदम अछि.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
बिहार सरकार एकटा नीक काज करय जा रहल अछि. अगर केंद्र सरकार के सहयोग मिलल त एकर नीक परिणाम मिल सकैत अछि. सरकार के कोशिश अछि जे नरेगा ( राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ) सं पढ़ल-लिखल कार्डधारी के निरक्षर लोक के पढ़ाबय के जिम्मेदारी देल जाए. एहि योजना मे शिक्षित कार्डधारी के साल मे कम सं कम एक सय दिन पढ़ाबय के काज देल जाएत. एहि मे हुनका कम सं कम दस लोक के साक्षर बनाबय के होतन्हि. अगर ई योजना के केंद्र सं मंजूरी मिलैत अछि त राज्य के लेल एकटा क्रांतिकारी कदम साबित भ सकैत अछि. जेहि राज्य मे करीब आधा लोक निरक्षर... अनपढ़ होए... ओतए सरकार के एहि कदम सं एकटा बड़का बदलाव आबि सकैत अछि. करोड़ों निरक्षर साक्षर बनि सकताह. पढ़ला-लिखला सं हुनकर जीवन मे बड़का बदलाव आबि सकैत अछि. संगहि संग राज्य सं होए वाला पलायन सेहो रुकत. किएक त पढ़ल-लिखल लोक के नरेगा सं पढ़ाबय के काज निलतन्हि. ओ एम्हर-ओम्हर टहलय के जगह पढ़ाबय के काज करताह. समाज मे मास्टर साहेब कहलएताह. समाज के जागरूक करताह. आब त नरेगा सं मिलय वाला रोज के पाई सेहो 89 रुपया सं बढ़ाकए 102 रुपया करि देल गेल अछि. अगर एकटा अनुमान लs कs चल...
दरभंगा जिला के बहादुरपुर प्रखंड के मनियारी पंचायत के मुखिया छथीह शकुंतला काजमी जी. मनियारी पंचायत के लोक के लेल ई सौभाग्य केर बात छैनि जे शकुंतला काजमी जी जैसन कर्मठ नेता हुनकर सभ के मुखिया छथीह. शकुंतला जी पहिने दिल्ली मे लोक कल्याण के काज मे लागल छलीह. गरीब-गुरबा के दुख-दर्द
एहि बेरक प्रतिष्ठित प्रबोध साहित्य सम्मान मैथिली साहित्यकार सोमदेव जीके मिलतन्हि. हुनका पटना के कालिदास रंगालय मे 19 फरवरी के प्रबोध साहित्य सम्मान- 2011 सं सम्मानित कएल जएतन्हि.
शीर्षक पढि कने उटपटांग लागल होयत। मोने सोचैत होयब जे लगभग पांच कोटि लोकक ठोर पर जाहि अमिट, अतिपावन भाषाक राज अछि, जे भाषा भारतक संगहि-संग नेपाल मे सेहो विशेष प्रतिष्ठित अछि, जे भाषा अपन विशाल आ अमूल्य साहित्यनिधिक बल पर भारतीय संविधानक आठम अनुसूची मे सन्हिया गेल, जे भाषा जनक सुता जानकीक कंठ-स्वर सं निकलैत छल, जाहि माटिक संस्कार सिया कें सुशीला बनौलक, ताहि भाषा पर कोन संकट आबि गेल? वा फेर सोचैत होयब जे हम बताह त' नहि भ' गेलहुं अछि? नाना प्रकारक सोच दिमागी समुद्र मे हिलकोर मारैत होयत। जं से सत्ते, त' अपन सोच कें कने स्थिर करी। असल मे ई प्रश्न आइ-काल्हि पद्मश्री उदित नारायण (झा) क' रहल छथि, सेहो पूरा तामझामक संग। मायक भाषा संग मोह जिनगी भरि बनल रहैत छैक। चाहे कतेको स्वार्थंधता वा दंभता केर गर्दा मोन-मस्तिष्क मे हो मुदा जखन भावना प्रबल प्रवाह होइत छैक त' लोक कें मोन पड़ैत छैक माय, मातृभाषा आ मातृभूमि। ओ प्रत्येक वस्तु जाहि मे मातृअंश हो, एक-एक के मोन पड़य लगैत छैक। मैथिली मे गायन शुरू कS आइ सफलताक उच्चतम शिखर पर पहुंचल उदित नारायण के कोनो एक भाषाक गायक नहि कहल जा सकैत अछ...
जाहि दिन सँ संविधानक अष्टम सूची मे मैथिली भाषाक नाम जुटल, हम सब अपना केँ गौरवान्वित महसूस कऽ रहल छी. बात इ गौरवक अछिहो. पूरा मिथिला आ मिथिलाक बाहरो जतऽ देखू ततऽ कार्यक्रमक आयोजन भेल. नवीन- नवीन मैथिली नामधारी संस्थाक उदय आओर मैथिल... मिथिला आ मैथिलीक विकासक चर्चा तऽ आम भऽ गेल. कियो मस्त छथि तऽ कियो मैथिली भाषाक विकासक चिन्ता सँ रोगग्रस्त. कतेक गोटय तऽ सामाजिक रूप सँ चिन्तित भऽ एना कहैत छथिन्ह जे कोशीक बाढ़ि सँ जतेक नुकसान नहि भेल ताहि सँ बेसी नुकसान मैथिली नहि बजला सँ होयत. जगह-जगह मंच सँ एक पर एक विद्वानक भाषणक संग किछु ललका कानवलाक कठहँसी सुनब, साधारण लोकक विवशता भऽ गेल. मातृभाषाक प्रति प्रेम कुनु खराबो बात नहि. संविधानो मे एकर विधान अछि जे प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा मे देल जाय. गजानन बाबू गामक प्रतिष्ठित... अवकाश प्राप्त शिक्षाविद छथि. अवकाश प्राप्त भेलाक पश्चात शहर छोड़ि, गामक स्थायी निवासी भऽ गेलाह संगहिं हुनके दलान पर चलय वला प्रायः अस्थायी चौपालक स्थायी सदस्य सेहो. बैसारी मे गजानन बाबू भरि दिनक अखबारी सूचना आ रेडियो-समाचारक आधार पर प्राप्त ज्ञान केँ साँझ होइतहिं, गामक लोकक बीच बँ...
आबि त गेलहुं मुदा आबय के मोन नहि करय छल. ओना त गर्मी छु्ट्टी मे गाम जाए छलहुं मुदा एहि बेर नवम्बर मे भगिनी के शादी होए के कारण गर्मी छुट्टी मे नहि गेलहुं. डेढ़ साल बाद गाम जाए के आनन्दे किछ आओर अछि. करीब 25 दिनक यात्रा के दौरान केवटी... दरभंगा... मधुबनी... राजनगर...भगवानपुर... जयनगर...देवधा... खजुरी-महुआ नेपाल आओर सासुर कस्मा-मरार जाए के मौका मिलल. एहि बेर सभ सं नीक गप ई रहल जे ऑर्कुट... फेसबुक आओर हेलो मिथिला सं जुड़ल कई लोक सं भेंट मुलाकात भेल. लोक सभ नीक काज कS रहल छथिन्ह. ऑर्कुट के एकटा संगी त जेहिआ मिललाह ओहि दिन एकटा मैथिली सीरियल बेटी के शूटिंग शुरू करय वाला छलाह. दरभंगा-मधुबनी के बेसि सड़क नीक भ गेल अछि सिर्फ दरभंगा सं हमर गाम जाए वाला रोड दरभंगा-जयनगर नेशनल हाइवे के हाल बड़ खराब अछि. एतेक उबड़-खाबड़ अछि जे देह के एक-एकटा हड्डी के जोड़ ढ़ीला भs जाएत. गाम तक पहुंचय धरि अगिला सीट पकड़ने रहलौं. लोक सभ भगवान के नाम लs कs सफर करय छथिन्ह. ओना एकरा जल्दीए ठीक होए के उम्मीद छै. दरभंगा मे दू टा शादी मे शामिल भेलहुं. भगिनी के शादी मे कन्यादान सेहो हमरे करय के रहय. ओहि के बाद गामे के ए...
दिल्लीक ताज पैलेस होटलमे 31 अगस्तक दिन आयोजित भव्य संगोष्ठी आ पुस्तक विमोचन समारोह मिथिला आ सम्पूर्ण भारतक सांस्कृतिक आ ऐतिहासिक चेतनाक दृष्टिकोण सं एकटा महत्वपूर्ण अवसर रहल। एहि आयोजनक मुख्य विषय छल 'भारतक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक आ
मधुबनी के पास सौराठ मे आई काल्हि सौराठ सभा चलि रहल अछि. लोक सभ एहि सभा के सभागाछी के नाम सं जानैत छथिन्ह. पहिने अगर अहां भूलल-भटकलों मधुबनी आ रहिका चलि जएतहुं त पता चलि जाएत जे लगनक टाइम आबि गेल अछि... आओर सभागाछी मे सभावास चलि रहल अछि. बस स्टैंड... रेलवे स्टेशन... रिक्शा... टेम्पो पर... चारुकात कतहुं देखु... लाल-लाल धोती... चमकैत रेशमी आ मलमल के कुर्ता... ललका पाग... मुंह मे पान... हाथ मे बेंत संग कथा-वार्ताक गप मे लीन लोक मिलि जाएत छलाह. गपक विषय बस एकेटा... फलां बाबू के एतेक मे तय भेलन्हि त फलां बाबू के ओतेक मे. फलां बाबू किछ ओर धीरज रखतथिन्ह त आओर कम मे कथा तय भ जएतन्हि. ओ त धरफरा गेलाह. फलां बाबू ठका गेलाह. हुनका अपन बात पर अड़ल रहबाक चाही छलन्हि. नहि जाने कि कि... पहिने जे बात के पता पांच-सात किलोमीटर दूरहिं सं चलि जाएत छल. आई अहां सौराठ गाम सं घुमिओ कs चलि आएब त पता नहि चलत जे आई-काल्हि सभावास चलि रहल अछि. पहिने गाजा-बाजा के संग उद्घाटन होएत छल. बिरादरी के पैघ-पैघ लोक जुटए छलखिन्ह. नेता... मंत्री सभ आबैत छलाह. आब खोजलों सं नहि मिलताह. पहिने जे कथा बिना सभागाछी के शास्त्रा...
दरभंगा मे एकटा पार्क बनय जा रहल अछि जेहि मे अहांके मिथिलाक सभ्यता... संस्कृति... लोक- परम्परा... गीतनाद... लोककथा आओर मिथिलाक विभूति सभ किछ के एकहिं ठाम दर्शन भs जाएत. लोक सभ के ई साहित्य आओर शिल्प के माध्यम सं जानए लेल मिलतन्हि. मिथिलाक थीम पर ई पार्क दरभंगा जक्शन के पास म्यूजियम मे बनय वाला अछि. एकर तैयारी पटना के प्रेमचंद रंगशाला आओर कॉलेज ऑफ आर्ट एंड कॉलेज मे चलि रहल अछि. सरकार के तरफ सं एहि लेल 30 लाख रुपया देल गेल अछि. एहि थीम पार्क मे आबि लोक अपन मिथिलाक बारे मे एहन-एहन जानकारी पाबि सकैत छथि जकरा बारे मे ओ सोचिओ नहिं सकैत छथिन्ह. लोक एहि ठाम आबि इतिहास सं रूबरु भ सकैत छथि. विदेश राजा जनक... माता जानकी सं लsक महाकवि विद्यापति सभ गोटे के बारे मे छोट सं लsक पैघ सभ तरहक जानकारी पाबि सकैत छथि. मंडन मिश्र आओर भारती जीक शंकराचार्य के संग शास्त्रार्थ वाला प्रसंग होए आ कोनो दोसर... सभ चीज के समाहित करय के कोशिश भs रहल अछि. मैथिली लोकगीत होए आ फेर मधुबनी पेंटिंग सभक जानकारी अहांके एहिठाम मिलि सकैत अछि. किछ रहि जाएत त लोकक अनुरोध के बाद ओकरा बा...
Prasanshneey.
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