दरभंगा मे एकटा पार्क बनय जा रहल अछि जेहि मे अहांके मिथिलाक सभ्यता... संस्कृति... लोक- परम्परा... गीतनाद... लोककथा आओर मिथिलाक विभूति सभ किछ के एकहिं ठाम दर्शन भs जाएत. लोक सभ के ई साहित्य आओर शिल्प के माध्यम सं जानए लेल मिलतन्हि. मिथिलाक थीम पर ई पार्क दरभंगा जक्शन के पास म्यूजियम मे बनय वाला अछि. एकर तैयारी पटना के प्रेमचंद रंगशाला आओर कॉलेज ऑफ आर्ट एंड कॉलेज मे चलि रहल अछि. सरकार के तरफ सं एहि लेल 30 लाख रुपया देल गेल अछि. एहि थीम पार्क मे आबि लोक अपन मिथिलाक बारे मे एहन-एहन जानकारी पाबि सकैत छथि जकरा बारे मे ओ सोचिओ नहिं सकैत छथिन्ह. लोक एहि ठाम आबि इतिहास सं रूबरु भ सकैत छथि. विदेश राजा जनक... माता जानकी सं लsक महाकवि विद्यापति सभ गोटे के बारे मे छोट सं लsक पैघ सभ तरहक जानकारी पाबि सकैत छथि. मंडन मिश्र आओर भारती जीक शंकराचार्य के संग शास्त्रार्थ वाला प्रसंग होए आ कोनो दोसर... सभ चीज के समाहित करय के कोशिश भs रहल अछि. मैथिली लोकगीत होए आ फेर मधुबनी पेंटिंग सभक जानकारी अहांके एहिठाम मिलि सकैत अछि. किछ रहि जाएत त लोकक अनुरोध के बाद ओकरा बाद मे जोड़ि देल जाएत. ओना एहि सं जुड़ल लोक सभ के अपना भरि कोशिश छनि जे किछ नहि छुटै. सरकार के योजना एहि तरहक दूटा आओर पार्क बनाबय के अछि. एकटा छपरा मे आ दोसर बेतिया मे. एहि दूनु पार्क मे बिहारक इतिहासक दर्शन कएल जा सकत सरकार के ई कोशिश नीक कदम अछि.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
कहीं मिथिला समर कैपिटल बनाने की तैयारी तो नहीं चल रही है...इससे पहले आपने बताया कि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है...अब थीम पार्क बन रहा है...बढ़िया है...खुशी की बात है...कहीं कुछ हो तो रहा है...
ReplyDeleteहितेंद्र जी जल्दी जल्दी सब कराइए...हम लोग घूमने आना चाहते हैं...आपके ब्लाग से एक फायदा तो है...मैथिल क्षेत्र की जानकारी मिल जा रही है...
ReplyDeleteअहां सभके बहुत बहुत धन्यवाद. अहांक विचार जानि मन प्रसन्न भ गेल. एहिना पढ़ैत रहु आओर लिखैत रहुं. मिथिला मे अहां सभ के स्वागत अछि सदिखन.
ReplyDeleteबहुत सुंदर...बहुत बढ़िया...
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