अथ श्री-श्री 108 स्वामी अनचिन्हारानन्द विरचित कलन्किया कथा
ई व्यंग पूर्णतः काल्पनिक अछि। एकर पात्र , घटना वा परिस्थितिसँ कोनो लेना-देना नै अछि। जँ कोनो पात्र वा घटना किनकोसँ मिलैत छन्हि तँ एकरा मात्र संयोग बूझल जाए। एहि अपीलकेँ बाबजूदो जँ केओ एहि व्यंगक घटनाकेँ

मुस्कुराहट मुस्कुराइपर मजबूर करैत अछि।
ReplyDeletehitendra bhaiya nav barkhak shubhkamna, hamar ekta lok katha maithil aar mithila par aayal achhi, dekhbak kripa karab, aa je nik lagay te otay comment seho deb
ReplyDeleteहितेन्द्र जी,
ReplyDeleteकतेक रास बात द्वारा आयोजित प्रतियोगिता मे अहाँके वर्ष २००८’क सर्वश्रेष्ठ ब्लोगर घोषित काएल गेल अछि. हमरा दिस सँ बधाई हो. आशा अछि मैथिली केँ इन्टरनेट पर आनबा मे अहाँक योगदान जारी रहत. अपनेक--
डा० पद्मनाभ मिश्र
hitendra bhaiya nav barkhak shubhkamna, hamar ekta lok katha maithil aar mithila par aayal achhi, dekhbak kripa karab, aa je nik lagay te otay comment seho deb.
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