मधुश्रावणी

आई प्रेस क्लब स बाहर निकलैत समय पवनजी मिल गेलाह...पुछलएन्हि कि औ बड़ दिन बाद दर्शन देलहुं...त कहलाह गाम गेल छलहुं मधुश्रावनी पर...पानि के कारण बाढ़ि में गामे पर फंसि गेलहुं एहि कारणे आबय में देर भ गेल...मधुश्रावणी के बात आबतहि मन भेल जे एकरा बारे में अहां सभ बात कएल जाय... मधुश्रावणी केर अपन मिथिला में विशेष स्थान अई...ई नवविवाहिता स्त्रीक पावनि अछि...नवकनिया सभ अपन पतिक दीर्घायु लेल ई पावनि करैत छथि...ई पावनि नैहर में मनायल जाइत अछि...मुदा एहि बेर बाढ़ि के कारणे कइटा नवकनिया के सासुरे में पूजा करय पड़लन्हि...
मधुश्रावणीक पूजा विवाहक पहिल सावन केर नागपंचमी के दिन शुरू होयत अछि आओर तेरह दिन तक लगातार पूजा होयत अछि...अहि में तेरहों दिन नव नव कथा सुनायल जायत अछि...कथैथिन कथा कहैत छथिन्ह... एहि में गृहस्थ जीवन में प्रवेशक कहानी- कथा होएत अछि...जेहि में व्यावहारिक पहलू के साथहिं यौन शिक्षा सेहो रहैत अछि...एहि कथाक बड़ महत्व अछि...एकरा एहि तरहे बनाओल गेल अछि कि एकरा पालन कएला सं जीवन सुचारु रूपें चलि सकय...अनुभवक सार रहैत अछि कथा में।
हमरा याद अछि जे गाम पर रहैत छलहुं त भरि मधुश्रावणी गामक छटा किछु अलगे रहैत छल...लाल, पियर, हरिहर साड़ी में जखन नैहर आयल नवविवाहिता सभ फूल लोढ़वाक लेल निकलैत छलन्हि तं ऊ दृश्य दोखवा जोगर होयत छल...नवविवाहिता सभ हाथ में डाला लेने मंदिर जाक पूजा करैत छलन्हि...ओहो एकसरे नहिं टोली बनाकए...हुनका सभक संगे कुमारि सखी सहेली...धिया पुता सभ रहैत छलन्हि...पूरा माहौल रंगीन बनल रहैत छल।
असल में सावन में बरसातक मौसम में सांप ढ़ोरि खूब निकलैत अछि...आओर ओकरा से पति के बचावय लेल...आ दीर्घायू के कामना के लेल विषहरी के पूजा कएल जाइत अछि...मिथिला केर हर पावनि त्यौहार लोक जीवन स जुड़ल अछि आओर ओकरा स जुड़ल अई लोक कथा...एहि लेल तेरहों दिन नव नव कथा सुनाएल जाएत अछि...


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