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कहिआ तक पेराएत रहत आम लोक!

देश के लोक महंगाई सं पेरा रहल अछि. खून चुसा रहल छनि. मुदा सरकार अपन लाचारी देखा रहल अछि. कृषिमंत्री पवार जी तेसरे राग पगारि रहल छथि. आब नीक-नीक लोक के खनाए पर आफत आबि गेल छनि. समस्या ई आबि गेल छनि जे कि कमाउ...कि खाउ ? आओर कि लsक गाम-घर जाउ? खाए-पीबय के सभ चीज मे आगि लागल अछि. सभक दाम आसमान
पर पहुंचल अछि.

रोज कमाए- खाए वाला लोक... दिहाड़ी मजदूर... प्राइवेट नौकरी करय वाला लोक सभ सं बेसि परेशान छथिन्ह. घर चलानाय मुश्किल भ गेल छनि. एहि के लsक सरकारक सेहो लोक नाराज छथिन्ह मुदा किछ कहि नहि सकय छथिन्ह. ओना पूर्व वित्त मंत्री आओर मौजूदा गृहमंत्री चिदंबरम जी कहबो करलखिन्ह जे टैक्स सं बेसि मारि मार रहल अछि महंगाई. ई लोक के आमदनी... कमाई के खएने जा रहल अछि. आओर सरकार किछ करय मे नाकाम साबित भ रहल अछि.

थाली केर तीमन... तरकारी आओर दूध त छोड़ू... नून...रोटी प्याज खनाय भारी पड़ि रहल छनि लोक के. पहिने ई रहय छल जे शहर मे जे चीज 50 रुपये मिलय छल ओ गाम -घर मे 5-दस रुपये मिलि जाएत छल. जे आलू-प्याज शहर मे 15-20 रुपये मिलैत छल ओ गाम-घर मे 4 -5 रुपये मिलि जाएत छल. मुदा आब पेपर... रेडियो...टीवी के कारण सभ ठाम एकहि दामे मिलैत अछि.

दिल्ली मे टमाटर 50 रुपये भेल नहि कि दरभंगा मे सेहो 45-50 रपये भ जाएत अछि. मुम्बई मे आलू 20 रुपये भेल नहि कि मधुबनी मे सेहो 18-20 रुपये भ जाएत अछि. मुदा दिल्ली...दरभंगा आओर मुम्बई... मधुबनी के लोक के कमाए देखय जाउ त ओहि मे जमीन आसमान के फर्क अछि. जे चावल दिल्ली मे 30 रुपये आब ओ दरभंगा मे सेहो 30 रुपये त लोक केना गुजारा करत.

गाम-घर... छोट शहर के लोक के ओ आमदनी नहि अछि. मुदा दिल्ली... दरभंगा सभ मे सर्फ...चीनी...साबुन...दवाई...पेस्ट...दूध..हॉर्लिक्स सभ के दाम एकहि तरह अछि. केना गुजारा होएत? महंगाई बढय के एकटा कारण सरकारी कर्मचारी आओर आईटी...प्रबंधन सं जुड़ल लोक के पाई मे भेल अनाप-शनाप वृद्धि सेहो अछि. आब देश मे एहन कर्मचारी कतेक होताह... एक करोड़... दू करोड़...

एहि एक...दू करोड़ लोक के त छठम वेतन आयोग के अनुसार वेतन मिल रहल छनि... सरकार बीच...बीच मे महंगाई भत्ता दैत रहैत अछि. एहि सं हिनका सभ के कोनो फर्क नहि पड़य छनि. मुदा आम लोक के की? ओ त अपन ओहे पुरनके पाई पर काम-काज करय लेल मजबूर छथिन्ह. पाई बढ़ाबय लेल कहला पर मालिक के तरफ सं फरमान आबि जाए छनि जे काज करय के छ त करय नहि त जा.

एहन महंगाई मे पवार जी किछ नहि करि रहल छथिन्ह. बस बीच-बीच मे किछ करय के जगह दाम बढ़य... सामान के कमी के भविष्यवाणी क दय छथिन्ह. जेहि सं जमाखोरी आओर बढ़ि जाएत अछि. दूध... चीनी... दालि... चावल... सब्जी किछ एहन नहि रहल जकर दाम आसमान पर नहि गेल अछि. जीनाए मुश्किल भ गेल अछि.

पिछला साल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद चारि बेर महंगाई पर लगाम लबाबय केर बात करलखिन्ह मुदा तखनो कोनो फर्क नहि पड़ल. एहि सं लगैत अछि जे सरकार एहि पर काबू करय चाहबो करैत अछि कि नहि. अगर महंगाई दर के देखय जाए त ई 18.32 प्रतिशत पर पहुंचि गेल अछि. आम लोक के लेल एहि दर सं कोनो लेनाए-देनाए नहि अछि. मुदा ई दर लोक के खएने जा रहल अछि.

एहि के लेल आम लोक सेहो कम जिम्मेदार नहि छथिन्ह. लोकतंत्र मे होएत अछि जे जनता के कोनो परेशानी... कष्ट होए छनि त ओ अपन विरोध प्रदर्शन करय छथिन्ह. धरना... प्रदर्शन सं सरकार के जगाबय छथिन्ह. मुदा ई सभ कतहुं देखा नहि रहल अछि. लगैत अछि जनते सुतल अछि त एहि मे सरकार के कोन दोष?

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