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परेशानी अखन आओर अछि...


जेना-जेना कोसी केर पानि घटि रहल अछि. बाढ़िक कहर लोकक सामने आबि रहल अछि. किछ इलाका मे पानि कम भेलाह सं लोक एम्हर- ओम्हर जाए- आबए लगलाह अछि. मुदा जाए- अएला सं एकटा बड़का सत्य केर सामना करय पड़ि रहल छैनि. गाम के गाम पानि मे बहि गेल अछि आओर जखन पानि पूरा बहि जाएत. लोक सभ गाम घर दिस जाए लगताह तखन नीक जका पता लागत जे कतेक बड़का नुकसान भेल अछि. अखन त कहल जा रहल अछि जे गाम के गाम बहि गेलाह के कारण लोक के पता नहिं चलि रहल छनि जे हुनकर घर कतए छलन्हि. कतय दलान छलन्हि आ कतय बाडि़-झाड़ि. किछ केर कोनो पता नहिं. लोक सभ जखन घर लौटताह त बड़का बवंडर भS सकैत अछि. ओहन लोक जे गाम घर छोड़ि बचय लेल सुरक्षित स्थान पर आएल छथि. बिहार सं बाहर चलि गेलाह. कतेक लोक त दिल्ली पंजाब दिस विदा भ गेलाह अछि. जखन अएताह त गाम घर के बदलल रुख देखि चौंकि जएताह. एहन मे सरकार के सेहो विशेष ध्यान देबय के जरूरत छै. लोक के अपन जमीन मिलय... खेत खलिहान मिलय तकर व्यवस्था होय किएक तं सभ किछ मिट गेल अछि... आरि-घुरि सभ किछ. कहां तक ककर खेत अछि एकर निशान सभ मिट गेल अछि. जोरगर लोक बरजोरी कS सकैत छथिन्ह. कमजोर... दुर्बल लोक के कष्ट आओर बढ़ि सकैत छन्हि. किएक त अखन, जखन राहत केर लेल जोरगर लोक महिला... बुजुर्ग आओर कमजोर के धकिया...राहत शिविर मे कात कS सभ किछ हथिआ लैत छथिन्ह... नाव पर कब्जा कS लैत छथिन्ह... सरकारी सामान सभ जे लोकक मदद केर लेल आबि रहल अछि ओहि पर कब्जा कS रहल छथिन्ह ओ जमीन... खेत-खलिहाल पर सेहो हाथ अजमा सकैत छथिन्ह. परेशानी अखन कम नहि बढ़ि रहल अछि. अहां सोचि सकय छी जे जखन लोक राहत शिविर सरकारी कैंप सं घर लौटताह तखन फेर सं एकटा दुनिया बसाबय पड़तन्हि. फेर सं शून्य सं... सिफर सं शुरुआत करय पड़तन्हि.

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