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Showing posts from February, 2015

दिल्‍ली मे 21 फरवरी के मैथिली साहित्‍य महासभा

संजीव सिन्हा मैथिली हमर सभक मातृभाषा अछि. अपन भाषा लेल सबके मोनमे अनन्त अनुराग होइत अछि. महाकवि विद्यापति मातृभाषाक महत्‍वके रेखांकित करैत लिखने छथि, ‘देसिल बयना सब जन मिट्ठा'– माने, अपन भाषा सबके मीठ लगैत अछि. हमरा सभक लेल ई गौरवक गप अछि जे मैथिली साहित्‍यक स्‍थान भारतीय भाषा मध्‍य महत्‍वपूर्ण अछि. मैथिली भाषाक स्‍वतंत्र अस्तित्‍व अछि. एकर व्‍याकरणक विशिष्‍ट पहचान अछि. एकर अपन लिपि अछि. एकर साहित्‍य

मैथिली साहित्य महासभा: दिल्ली चलू

२१ फरबरी, २०१५ - कन्स्टीच्युशन क्लब केर डेपुटी चेयरमैन हॉल मे स्थापना समारोह मनाओल जायत. दिनक महत्त्व अनुरूप मातृभाषा मैथिली मे दुइ अगाध योगदानकर्ता- डा जयकान्त मिश्र व भोलालाल दास केर स्मृति मे साहित्य सम्मान केर नव घोषणाक संग एक बेर फेर मैथिली साहित्यक स्वर्णकालीन युग १४म शताब्दी जेकाँ वर्तमान युगक युवा विद्यापति, ज्योतिरिश्वर सँ लैत निरन्तर २१म शताब्दी धरिक सृजनशील स्रष्टा-साहित्यकार केँ राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ैत मिथिला संस्कार केँ पोषण देबाक ई नवयोजना अछि. आत्मालोचना सँ शुरु कैल गेल ई नव योजना कोनो