आचार्य सुरेन्द्र झा सुमन जीक जयंती दरभंगा मे मनाएल गेल. हिन्दी... मैथिली... संस्कृत के विद्वान आओर पूर्व सांसद सुमन जीक जयंती समारोह दरभंगा के चंद्रधारी म्यूजियम मे भेल.
जयंतीक लेल एकटा समिति सेहो बनाएल गेल छल कमलाकांत झा जीक अध्यक्षता मे. एहि अवसर पर एकटा स्मारिका केर विमोचन सेहो कएल गेल. समारोह केर शुरूआत चंद्रमणि जीक शिवपंचाक्षरी गायन सं भेल. एकर रचना सुमनजी कएने छलखिन्ह. एहि समारोह मे संस्कृत आओर मैथिली के विद्वान के सम्मानित सेहो कएल गेल. संस्कृत केर लेल डॉ उपेन्द्र झा आओर मैथिली केर लेल अमलेन्दु शेखर पाठक जी के सुमन साहित्य सम्मान सं सम्मानित कएल गेल. एहि अवसर पर बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के कहनाय छलन्हि जे सुमन जी सिर्फ मैथिली के नहिं वरन भारतीय साहित्य के पुरोधा छलखिन्ह. हिन्दी साहित्य केर समालोचक प्रो. अजित कुमार वर्मा जीक कहनाय छलन्हि जे आचार्य सुमन जी राष्ट्रीयता... मानवीयता आओर मिथिला के प्रतीक छलाह. वो राजनीति... जाति ... भाषा बंधन से उपर समग्र मिथिला के युगपुरूष छलाह. समारोह मे काव्य पाठ सेहो भेल जेहि मे डा. विद्याधर मिश्र... डा. शशिनाथ झा... डा. गणपति मिश्र... मैथिलीपुत्र प्रदीप... डा. फूलचन्द्र झा प्रवीण आओर हरिश्चन्द्र हरित जी काव्यपाठ कएलाह. गीत नाद के कार्यक्रम मे चन्द्रमणिजी... अरविन्द कुमार झा... ओमप्रकाश सिंह आओर हीरा कुमार झा जी अपन संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत कएलखिन्ह.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
Comments
Post a Comment