पूरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महराज 20 जून के दरभंगा आबि रहल छथिन्ह. ओ दरभंगा में 21 जून के स्वामी विवेकानंद कैंसर अस्पताल के भूमि पूजन में शामिल भs लोक सभ के आशीर्वाद देथिन्ह. पीठ परिषद के लोक सभ हुनकर आगमन के तैयारी में जोर शोर सं जुटल छथिन्ह. शंकराचार्य जी महराज 22 जून के कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ जयंत मिश्र जीक रचित युगल श्री गीति मालिका ग्रन्थक लोकार्पण करथिन्ह. ओ 23 तारीख के दरभंगा महाराज जीक जन्मभूमि हरिपुर बक्शीटोल में में शंकराचार्य द्वार के उद्घाटन करताह. एहि दिन हुनकर एकटा कार्यक्रम कलुआही हाईस्कूल में सेहो छनि. एहि ठाम ओ रामसेतु रक्षार्थ आमसभा के संबोधित करथिन्ह. 24 ताऱीख के मधुबनी में रहताह. एकर बाद 25-26 जून दु दिन महिनाम में हिनकर प्रवचन छनि.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
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