कटिहार जोगबनी रेलखंड पर बड़ी लाइन बनाबय के काज भs रहल अछि. काज अखन पूरा नहिं भेल अछि मुदा कई ठाम प्लेटफॉर्म धंसि गेल अछि त कई ठाम प्लेटफार्मक मकान में दरार पड़ि गेल अछि. फारबिसगंज प्लेटफ़ॉर्म बनतहिं धंसि गेल. अररिया स्टेशनक मकान में दरार पड़ि गेल तs पूर्णिया के प्लेटफॉर्मक सीढ़ी टूटि गेल. ओना एकर सभक मरम्मतक काज चलि रहल अछि मुदा निर्माण काज चलतहिं एकरा सभमें दरार पड़ला आ टूटला सं एकर गुणवता पर सवाल उठय लागल अछि. लोक सभ में सेहो गुस्सा छै. फारबिसगंज में तs रेलवे अधिकारी के घेराव सेहो कएल गेल. मिथिला के एहि इलाका के विकास के लेल रेल के बड़का योगदान अछि. मुदा एकर निर्माण काज में अगर कोनो तरहक कोताही बरतल गेल तs ओ खतरनाक साबित भs सकैत अछि. एहि के लेल एहिठाम लोक के जागरूक होबय के जरूरत अछि. काज पर नजर रखय के जरूरत अछि.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
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