झंझारपुर में कमला बलान पर बनल रेल -सड़क पुल के हालत एकदम खस्ता भs गेल छै. एहि ठाम अक्सर कोनो न कोनो दुर्घटना होएते रहैत अछि. एकहिं संग दुनु पुल होय के कारण एहिठाम लोक के सदिखन जाम सेहो मिलैत छै. पुल पर रेल लाइन के दुनु बगल... पटरी के दुनु कात आओर बीच में लकड़ी के पटरा सभ जे कील सं ठोकल छै ओकर कील आब निकलि गेल छै. कील के ढीला भs गेला सं पटरा के एक तरफ लात पड़त त पटरा दोसर तरफ उठि जाएत. ऐना में कई बेर एहन होय छै जे मोटर साइकिल... साइकिल के चक्का पटरा के एकटा छोर सं पार भेर कि दोसर छोर उठि गेल..झुला टाइप सं. एहि सं दुर्घटना सेहो भ जाए छै. गाड़ी के बैलेंस एकदमे सं गड़बड़ा जाइ छै. कई ठाम त बड़का बड़का फांक भ गेल छै. एहि फांक सभ में कोनो गाड़ी फंसि गेल त फेर कल्याणे बुझु. लोक के सभ काम काज सेहो फंसि जाइत अछि. पुल के पाया सभ सेहो कमजोर जका लगैत अछि. एकरा पर ध्यान देबय के जरूरत अछि. जिनका पता छनि वो गाड़ी चलाबय वाला लोक सभ एहिठाम संभलि क चलैत छथि मुदा कइटा नवका लोक एहि ठाम फंसि जाइत छथि. एहि ठाम कोनो गाड़ी फंसल कि समझु बड़का जाम लागल. जाम सं कइ बेर सकरी आओर झंझारपुर के बीच रेल गाड़ी सेहो फंसि जाइ छै. आओर जखन तक रास्ता साफ नहिं भेल बैसल रहु गाड़ी में... किछ कओ नहिं सकैत छी. अगर जल्दीए एकर कोनो उपाय नहिं कएल गेल त कोनो दिन बड़का दुर्घटना भ सकैत अछि. एहि लेल पहिने सं सावधानी... सतर्कता बरतैत एकरा मरम्मत के जरूरत अछि.
श्वेता के जन्मदिनक पार्टी सं डेरा त आबि गेलहुं, मुदा आब ध्यान श्वेता सं हटि क अल्का पर अटैकि गेल। मोन एकदम सं फ्लैशबैक मे चलि गेल—कॉलेजक दिन, जे जीवन के सबसे रंगीन, मस्ती आओर मासूमियत सं भरल समय छल। बारहवीं के बाद कॉलेजक पहिल दिन, कहिओ नहि बिसराबय वाला दिन। ओहि दिन पहिल बेर मिलल छलीह अल्का। क्लास मे विद्यार्थी सभ के इंट्रोडक्शन चलि रहल छल। परिचय सं पता चलल जे अल्का सेहो दरभंगा के छथीह। बिहार सं आओर छात्र सभ छल, मुदा अपन शहर के बाते किछु आओर होए छै। जखन बात अपन शहर के होए त लगाव कनि बेसि बढ़ि जाए छै। अल्का यानी मैथिल ब्यूटी, सभ सं अलग। एकदम सं मासूम। एकटा अलगे भोलापन लेने। मोन सं, दिल सं एकदम आईना जकां साफ। दुनियादारी के छल-कपट, होशियारी सं दूर। बोली अतेक मीठ जेना आवाज में मिश्री घुलल होए। मोन होएत छल जे एकटक दैखेत रही आ हुनका सुनिते रही। केतबो खिसिआएल छी, अल्का के आवाज सुनि लिअ सभ शांत भ जाएत। मैथिली त ओहिना मीठ होएत अछि, मुदा अल्का के आवाज मे एकटा अलगे जादू आ कहु सम्मोहन छल जे अहां अपना के बिसैरि हुनका मे खो जएतौं। मंदिर के घंटी जकां मन प्रसन्न करि देबय वाला। सादगी एहन जे देखिते मुंह...
बढ़िया से खबर ली है। लगे रहो।
ReplyDeleteउमेश चतुर्वेदी