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सीएम नीतीश के नाम मनियारी पंचायत केर मुखिया के पत्र

दरभंगा जिला के बहादुरपुर प्रखंड के मनियारी पंचायत के मुखिया छथीह शकुंतला काजमी जी. मनियारी पंचायत के लोक के लेल ई सौभाग्य केर बात छैनि जे शकुंतला काजमी जी जैसन कर्मठ नेता हुनकर सभ के मुखिया छथीह. शकुंतला जी पहिने दिल्ली मे लोक कल्याण के काज मे लागल छलीह. गरीब-गुरबा के दुख-दर्द
हिनका से देखल नहि जाए छनि. गरीब, मजबूर लोक के लेल ई थाना, दरोगा, एमएलए, एमपी आ बड़का सं बड़का नेता सं लड़ि पड़य छथीह. दिल्ली मे हिनकर आम लोक लेल लड़य के जे जुझारुपन छनि ओ हम देख चुकल छी. हिनका सं अन्याय बर्दाश्त नहि होय छनि।


शकुंतला जीक सासुर दरभंगा के होए के कारण हिनकर पति नदीम अहमद काजमी जी हिनका अपन इलाका मे काज करय लेल उत्साहित करलखिन्ह. नदीम जी एनडीटीवी जैसन पैघ संस्थान मे पत्रकार होए के बावजूद लोकसेवा मे लागल रहय छथिन्ह. पढ़ाई-लिखाई के समय सं छात्र राजनीति मे रहय के कारण जेएनयू मे आम लोक के मुद्दा उठाबय छलखिन्ह. पत्रकारिता के संग-संग अखनो कमजोर तबका के लोक के लेल भलाई के काज मे लागल रहय छथिन्ह. दुनु गोटे के अंदर जे लोक सेवा के जुनून छनि ओ बड़ कम लोक मे देखय लेल मिलैत अछि. एहि सेवा भावना के कारण ओ अपन इलाका के विकास के लेल अपन पत्नी के दिल्ली छोड़ि दरभंगा के छोट मनियारी पंचायत मे काज करय लेल कहलखिन्ह. हिनकर एकमात्र उद्देश्य अपन इलाका के विकास आ ओकरा आगां बढ़ाबय के छनि. मुदा एहि ठामक गाम-घर के पीठ-पाछां के तुच्छ राजनीति के कारण ओ परेशान छथिन्ह.


किछ लोक सभ के सरकारी पाई के खाय-पीबय के जे चस्का लगि चुकल छलैन... ओ शकुंतला जीके कारण बंद भ गेलन्हि...एहि कारणे ओ सभ हिनका परेशान करय पर लागि गेल छथिन्ह. इलाका के किछ लोक... किछ नेता ई नहि चाहय छथिन्ह जे शकुंतला जी मनियारी मे रहि काज करैत. ओ अपन हुक्का-पानी बंद होए सं परेशान भ शकुंतला जी के परेशान करय चाहय छथिन्ह. आई-काल्हि बाढ़ि के बाद जे राहत कार्य चलि रहल अछि ओहि मे भ रहल छह-पांच के शकुंतला जी बंद करय चाहय छथिन्ह... जेहि के कारण ओ छोटगर नेता सभ हो-हल्ला मचौने अछि. एहि पर शकुंतला जी मुख्यमंत्री नीतीश जी के एकटा चिट्ठी लिखलीह... हम ओहि चिट्ठी के ओहिना के ओहिना हिंदी मे एहिठाम राखि रहल छी...


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी,
आपका कदम सराहनीय लेकिन इतनी जल्दबाजी क्यों?

बिहार में बाढ़ ग्रस्त इलाक़े से बाढ़ का पानी तो उतर रहा है लेकिन लोगों का पारा चढ़ता जा रहा है...हर दिन कहीं न कहीं सड़क जाम करने की खबर आ रही है. भीड़ बेकाबू हो रही है और प्रशासन को उसे संभालना मुश्किल हो रहा है. पुलिस वालों की मानें तो उनकी परेशनी बाढ़ की त्रासदी से ज़्यादा अब बढ़ गयी है. इसका कारण है लोग उतावले हो रहे हैं उस राशि के लिए, जिसकी घोषणा राज्य सरकार ने की है. राज्य सरकार ने पहले तो 9800 रुपये सीधे बाढ़ पीड़ितों के खाते में बाढ़ रहत कोष के तौर पर भेजने का वादा किया जिसे बाद में घटा कर 6500 रुपये कर दिया गया.

समस्या यहीं से शुरू हुई. अब हर कोई अपने खाते में रुपये का सपना ले कर रात को सोता है और सुबह में बैंक भागने की जुगत में रहता है. सवाल यह है कि बाढ़ राहत किसे दी जाए. कहीं ऐसा तो नहीं कि यह राशि असली पीड़ितों के पास न पहुंच कर बिचौलियों के पास पहुंच रही है या पहुंचाने की कोशिश हो रही है.

जगह-जगह धरना प्रदर्शन और रोड जाम के पीछे इन ही बिचौलियों की भूमिका नज़र आ रही है, जो जनता को रुपये का लॉलीपॉप दिखा कर दिग्भ्रमित करने में जुटे हैं और कहीं न कहीं इसमें सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की भी मिली भगत है.

बाढ़ पीड़ितों की सूची बनाने की ज़िम्मेदारी वार्ड सदस्यों की है जो प्रखंड कर्मचारियों की मदद से लिस्ट तैयार कर रहे हैं, लेकिन लिस्ट कितनी सटीक और सही है इसकी जांच कौन करेगा. ऐसा तो नहीं लूट के लिए उन लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं जो पीड़ित नहीं हैं और उनसे बन्दरबांट कर सही पीड़ितों का हक़ छीना जा रहा है.

दरभंगा ज़िले में बहादुरपुर प्रखंड  के मनियारी पंचायत की मुखिया होने के नाते जब मैंने लिस्ट मांगकर उसकी सत्यता की जांच करने की गुहार लगाई तो अधिकारी, कर्मचारी और वार्ड सदस्यों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया जिस से मेरा शक और गहरा हो गया. एक वार्ड सदस्य ने बात स्वीकार्य की तो हमने जनता के सामने सूची पढ़ कर सबके सामने जोड़-घटा कर सूची पारित की. इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बेहतर परम्परा मानना चाहिए, लेकिन यही लोकतान्त्रिक प्रक्रिया उन्हें बुरी लग रही है जिनके दाल में कुछ काला है  या सारी दाल ही काली है.

मैं मुखिया के रूप में कैसे उस सूची को पारित कर दूँ जिसका सत्यापन नहीं हुआ है और जिसमें त्रुटियां हैं. आखिर लोगों में इतनी जल्दबाज़ी क्यों है. अधिकारी, कर्मचारी और वार्ड सदस्य क्यों नहीं चाहते कि पैसा असली ज़रूरतमंदों के पास जाए. हमारा घेराव भी हुआ. घर पर हमला भी हुआ, सड़क जाम भी किया गया. लेकिन मैं नीतीश सरकार के इस मंशा को कमज़ोर नहीं होने दूंगी. चाहे मेरी जान क्यों न चली जाए कि पैसा सही व्यक्ति और परिवार तक पहुंचे. नीतीश सरकार के सीधे खाते में पैसा भेजने का मक़सद यही है कि मदद बाढ़ पीड़ितों के खाते में पहुंचे और अधिकारी, कर्मचारी, बिचौलिए लूट न मचायें, जैसा कि पूर्व में होता रहा है. इससे पहले सहायता राशि नक़द दी जाती थी जिसमें आधी ही पीड़ित के पास पहुंच पाती थी. सरकार का क़दम बहुत अच्छा है, लेकिन लुटेरे अपना रास्ता ढूंढ ही निकालते हैं. दबाव बना कर सच्ची-झूठी सूची पास करा कर अपना-अपना जेब भरने की कोशिश जारी है.

शकुंतला काज़मी,
मुखिया, मनियारी पंचायत,
बहादुरपुर प्रखंड,
जिला- दरभंगा
बिहार

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