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बैल राजकीय पशु आओर गौरेया बनल राजकीय पक्षी

बैल बिहारक राजकीय पशु बनि गेल अछि. एकरे संग राज्य सरकार के तरफ सं गौरेया के राजकीय पक्षी, पीपल के राजकीय गाछ आओर गेंदा के राजकीय फूल के रूप मे मान्यता देल गेल अछि..

मंगलदिन बिहार कैबिनेट के बैसार मे एहि बारे मे फैसला कएल गेल.

सरकार के कहनाए अछि जे बैल, गौरेया आओर पीपल संकट मे अछि. एकर संरक्षण जरूरी अछि.

सरकारक मुताबिक आईकाल्हि खेती मे ट्रैक्टर...ट्रॉली आओक थ्रेसर जैसन मशीन के इस्तेमाल
होए सं बैल के महत्व कम भेल जा रहल अछि. एहिना पेड़- पौधा...जंगल कम होए के कारण गौरेया सेहो कम भ रहल अछि.

बैल...गौरेया के अस्तित्व पर संकट आबि गेल अछि. एहि लेल एकरा बचानाए जरूरी भ गेल अछि. एहि क्रम मे राजकीय पशु आओर पक्षी बनला सं बैल आओर गौरेया के संरक्षण भ सकत.

गाम-घर मे पीपल के गाछ सेहो कम भेल जा रहल अछि. लोकक सांस्कृतिक...धार्मिक मान्यता सेहो जुड़ल अछि एहि सं. गाम-घर मे ब्रह्मस्थान मे पीपल केर गाछक पूजा सेहो होएत अछि.

एहि सभ के संग कैबिनेट के बैसार मे मधुबनी जिला के झंझारपुर ब्लॉक मे सुगरवे नदी पर पुल निर्माणक मंजूरी सेहो देल गेल.

संगे संग सिपाही आओर दरोगा के भर्ती मे महिला के 35 फीसदी रिजर्वेशन देबय के फैसला सेहो कएल गेल. ई रिजर्वेशन पहिने सं पिछड़ा वर्ग केर महिला के मिलय वाला 3 प्रतिशत आरक्षण के अलावा मिलत.


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