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हमर विआह-11

गप भेलाह के बाद बाबूजी त किछ शांत भेलाह मुदा मां के बेचैनी कम नहि भेलन्हि. मां बेर-बेर बाबूजी के कहैत रहलीह जे अहां त एकरा एकदम हल्का सं लेने छिएन्हि. एकरा कनि सीरियस भ सोचिऔं. कनिओ ध्यान नहि द रहल छिएन्हि. एकदम सं अनठिएने छिएक.

सभ किछ उम्रे पर नीक लगै छै...अखन नहि विआह करबन्हि त कहिआ करबन्हि? बूढ़ाs जएथिन्ह तखन करबन्हि की? बौआ केर तुरिया के जतेक लड़का छलन्हि सभके घर बसि गेल छैनि...नेना-भुटका सेहो भ गेल छैनि.

नहि होए अछि त अहां खुद दू दिन लेल किएक नहि दिल्ली चलि जाए छी? जाउ नीक सं बात क लेब. नहि त बौएके बुला लिअ. काम-काज नीक सं चलिए रहल छनि... फेर कोन दिक्कत छनि.

अहां बौआ के दोस्त सभ सं सेहो किएक नहि बात करय छिएन्हि? अखन विआह करय के उम्र छनि. शोभा-सुन्दर के सेहो एकटा समय होए छै.
आब त एहन भेल जे दिन भरि मे मां चारि-पांच बेर बाबूजी के सामने एहि बात के छोड़ि देए छलीह. बाबूजी परेशान भ गेलाह.

संयोग एहन जे एहि बीच मामा जी सेहो घुमैत-फिरैत गाम पहुंचि गेलाह. खाना खाए के समय मां हुनका सामने सेहो एकर जिक्र करि देलीह. दिल्ली वाला गप सुनला के बाद मामा जी के नहि रहल गेलन्हि.

ओ कहलखिन्ह जे बौआ के त हमहीं वीरेन्द्र बाबू के लड़की के बारे मे बतौने छलिएन्हि. वीरेन्द्र बाबू के लड़की सेहो दिल्ली मे नीक पोस्ट पर काज करय छथीह. सुन्दर-सुशील सेहो छथीह. नीक कथा अछि ई.

ई सुनतहिं बाबूजी भड़कि गेलाह. मामाजी पर खिसिआएत कहलखिन्ह त ई सभ अहां के लगाएल अछि. बौआ के बताबए सं पहिने कनि हमरा बता देने रहितौं त की भ गेल रहैत. अगर नीक कथा अछि... लड़की नीक अछि आओर बौआ के पसंद छनि त फेर दिक्कत की अछि?
बौआ के जे पसंद से हमर सभक पसंद... आओर भगवान के शुक्र त ई अछि जे कथा अपने जाति-बिरादरी मे अछि. नहि त बाहर निकलि गेल बच्चा सभ पर कोनो भरोस नहि...अगर ओम्हरे खोजि क कोनो सं क लेत त की करि लेबय.

मां के त जेना मनक मुराद पूरा भ गेलन्हि. मामाजी पर प्रेशर बनाबैत कहलीह... अहां किछ दिन के लेल दिल्ली चलि जाउ आओर बौआ के मन के थाह लिऔन जे एहि कथा पर हुनकर कि विचार छनि.

मामाजी हां मे हां मिलाबैत कहलखिन्ह अहां सभ बेकारे परेशान होए छी. हम काल्हिए जा क रिजर्वेशन करा लैत छी. वीरेन्द्र बाबू के सुपुत्र सेहो रहय छथिन्ह ओहिठाम हम हुनका सं सेहो भेंट क लेबन्हि.

आओर वीरेन्द्रबाबू त छोटका पाहुन लालबाबू (छोटा बाबू) के संगी छैन... किएक नहि हुनका सं गप करय छियैन. दू दिन के लेल छुट्टी ल s क चलि अएताह आओर वीरेन्द्रबाबू सं भेंट क लेथिन्ह.
मामाजी सं एहि बारे मे गप क मां के कनि धीरज अएलन्हि. मां छोटा बाबू के सेहो फोन पर गप क दू दिन के छु्टटी ल गाम आबय केर फरमान सुना देलीह.

एहन सभ परिवार मे होएत अछि. जखन तक पढ़ैत रहुं... त कहिआ नौकरी होएतन्हि... नौकरी भेल त कतs नीक कनिआ मिलतन्हि. शादी भ गेल त कहिआ पोता- पोती के मुंह देखब. आओर ई सभ होएत रहैत अछि त जी जुड़ाएत रहैत अछि.

ओम्हर मामाजी दिल्ली आबय के तैयारी मे जुटि गेलाह. एम्हर हम एहि गुनधून मे लागि गेलहुं जे श्वेता हमरा बारे मे की सोचय होतीह...अल्का के की हाल होएतन्हि.
अल्का त हमरा बारे मे सभ जानए छथीह. मुदा श्वेता त किछ खास नहि जानए छथीह हमरा बारे मे. की धारणा बनि गेल होएतन्हि हमरा बारे मे? की सोचय सोचय होतीह हमरा बारे मे?

दिमाग मे इहे सभ घुमि रहल छल कि फोन घनघनाए लागल. देखलौं त नव नंबर छल. बात करय पर पता चलय जे अल्का के एहिठाम वाला नवका नंबर छल. जेहिआ तक इंडिया मे रहतीह तेहिआ तक एहि नंबर पर गप होएत.

ओ हमरा सं किछ गप करय चाहय छलीह. मिलय चाहय छलीह. तय भेल जे काल्हि सीपी मे मैकडोनल्ड मे मिलल जाए. आब देखिऔ काल्हि की होएत अछि?
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4 comments:

  1. e aha ek ta k part bhej k humra sab ke utsukta badha dai chi hamra hoye je sab ta hum ekai din padhi li chalu intezar karab

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