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जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

राष्ट्र हमर भारत थिक
जे विश्वगुरुक महिमा सँ मंडित
तकर कान्ह पर थिक सुशोभित
हमर जन्मभूमि मिथिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

अनेकता मे एकता थिक देशक प्राण
यैह तऽ थिक एक्कर पहिचान
ओहि अनेक मे सँ एक
हमर जन्मभूमि मिथिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

हिन्दक मही पर थिक विद्यमान
संस्कृति अनेक बनि चान
मिथिलाक संस्कृति सेहो एक
अविरल दीप्तिमान विशेष शिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

माटि सोन ओ देश मणि
कन्हुआ कऽ ताकै एम्हर कनी
आँखि देबौ दुनू फोड़ि आ
दम लेबौ तोरा माटि मिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

माटिक सेवक छी हम देशभक्त
एकरा लेल बहा सकै छी रक्त
माटि लेल पसीनाक ठोप-ठोप
सुखा सकब ने कथिला?
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

पहिने हित देशक फेर प्रदेशक
अगुआ सभ ले तोँ ई सबक
नहि तऽ एहि देशक जनता
चटिएतौ तोरा झोट्टा हिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

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रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'/नवकृष्ण ऐहिक
More Poems (Published) By रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'
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1 comment:

  1. रूपेश कुमार झा ji --
    bahut nik -------
    हमर जन्मभूमि मिथिला
    जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

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