नवका- पुरनका लेख सर्च करु...

बाहरी सं बेहाल दिल्ली


बाहरी लोक सं दिल्ली बेहाल अछि. मुख्यमंत्री शीला दीक्षितजी के मानल जाए त दिल्ली के हाल बाहर सं आबए वाला लोक के कारण बेकाबू भs रहल अछि. हुनकर साफ कहनाय छनि जे बाहर सं आबए वाला लोक पर कोनो तरहक रोक-टोक नहि होबाक कारणे दिल्ली के जनसंख्या दिन पर दिन बढ़ल जा रहल अछि. एहि के कारण एहि ठामक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ बढ़ल जा रहल अछि. लोक सभ के दय जाए वाला सुविधा मे कमी पड़ि रहल अछि. हालात एहन भेल जा रहल अछि जकरा अहां बेसंभार कहि सकय छी. मुख्यमंत्री के कहनाय छनि जे बाहर सं आबय वाला लोक दिल्ली के लेल एकटा बड़का चुनौती साबित भs रहल अछि.
एकरा अहां कि कहबय ? एना नहि अछि जे शीला जी ई बात पहिल बेर कहलथिन्ह. पहिनहुं कहि चुकल छथिन्ह. ओना एहने गप जे राज ठाकरे कनि घुमाs कs कहय छथिन्ह त बड़का प्रतिक्रिया होएत अछि. मुदा शीला जी के बयान पर कोनो खास प्रतिक्रिया नहि भेल. ओना दुनु मे कोनो खास फर्क नहि अछि. दुनु ठाम बात बाहरिए के अछि. बाहरी यानी यूपी... बिहारी.
आखिर एहन हालात के लेल जिम्मेदार के? कि एहन हालात के लेल केंद्र नहि जिम्मेदार अछि . अगर यूपी-बिहार के नीक जकां विकास होएत. लोक के जीवन स्तर नीक रहैत. इलाका पिछड़ल नहि रहैत त फेर लोक दिल्ली कि रुख किएक धरैत? बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार लेल विशेष पैकेज मांगैत रहि गेलखिन्ह. मुदा केंद्र टस सं मस नहि भेल. विशेष पैकेज त छोडु कोनो विशेष मदद सेहो नहि देलक. हाल एहन अछि जे प्रधानमंत्री कोसी बाढ़ि के राष्ट्रीय आपदा मानलखिन्ह. मुदा पाई देबय काल मे हाथ खींच लेलखिन्ह. आब इलाका के लोक कि करत?
नहि बांध... नहि सड़क... नहि रेल.. नहि कोनो कारखाना.. नहि कोनो रोजगार के उपाय. जिनगी जीवय लेल त किछ न किछ त करहिए पड़त. जखन धरि देह मे काबू अछि लोक काज करैत रहैत अछि. गाम मे काज नहि मिलत त दिल्ली... मुम्बई मे त मिलत. देशक सभ सुविधा... इंफ्रास्ट्रक्टर... रोड.. रेल... नौकरी एहि सभ ठाम मिलैत छै त फेर लोक जाएत कतs.
अहां बिहार मे सेहो नीक रोड बनिबिऔ... पुल बनिबिऔ... रेलक पटरी बिछबिऔ... कल-कारखाना लगिबिऔ... बिजली के सुविधा दिऔ... आईटी... शिक्षा पर विशेष ध्यान दिऔ... बाढ़ि के समस्या के समाधान करिऔ.. देखिऔ के आबय अ दिल्ली...मुम्बई आओर पंजाब. कौओ नहि पूछत. आखिर अपन गाम-घर... बाल-बच्चा के छोड़ि कs के आबय चाहय छै ? अहां सभ केंद्र के सरकार... नेता सभ हाले तेहन करि देने छिएक जे बिना गाम-घर सं निकलने कोनो गुजारे नहि अछि. फेर हम कतहुं जा रहल छी त ओ देशहि मे अछि न. कि देश मे कतहुं अनाए-जनाए.. कमानाए-खनाए अपराध अछि ?
Share/Save/Bookmark
हमर ईमेल:-hellomithilaa@gmail.com




No comments:

Post a Comment

अहांक विचार/सुझाव...