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मायक आशीर्वाद

घर सँ बहराइतेँ माइ कहलनि
जा...जाए छs त मुदा
एकटा बात मोन मे खोइस लs
जखन कहियो आकाश बाटे जहिs त
सम्हरि केँ चलिहs आ किछु आन चीज नहि छूबिहs
चान तरेगनक गाम आएत
लागत पैरक ठेस त टूटि जायत
बड्ड नोखगर होइत अछि घोपाइयो जाइत
जखन रौद फुटत तखने यात्रा करिहs
किएsकि रौदे मे रहय छै ठंढक छॉव
भगवाने बचेताs तोरा सभ दुख सँ
हमर आशीर्वाद त साथहि छs “बऊआ”
-त्रिपुरारि कुमार शर्मा

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हमर ईमेल:-hellomithilaa@gmail.com


2 comments:

  1. बड्ड नीक लागल | पढ़ैते मायक याइद आबि गेल | लिखैत रहु त्रिपुरारि जी | मिथिला आ मैथिली के नाम रौशन करैत रहु |

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  2. Mujhe kuchh samajhh mein aaya kuchh nahin aayaa, par tun maithili mein bhi likh sakte ho, yeh jaankar zaroor achchha laga.

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