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दरभंगा मे नवाह यज्ञ



एहि बेर दिल्ली सं गाम जाए के क्रम मे पहिने गाम नहि गेलहुं. किछ दिन दरभंगा शहर मे रहय पड़ल. दरभंगा मे भगिनि के शादी छल ताही लेल सभ कोई... सभ रिश्तेदार दरभंगे आबि गेल छलखिन्ह. ओना त शादी सं पांच दिन पहिने पहुंचि गेल छलहुं तखनो सभ गोटे दरभंगे आबि गेल छलखिन्ह तखन हमहुं गाम केवटी जा क कि करतहुं. ओना गाम बेसि दूर नहि अछि शहर सं बस 16 किलोमीटर. सभ लोक के दरभंगा पहिनहि आबय के एकटा कारण ओहि बीच श्याया माई मंदिर मे नवाह यज्ञ के होनाए सेहो छल.


दरभंगा के राज कैंपस मे राज श्मशान मे स्थित मां रमेश्वरी श्यामा काली मंदिर मे पूजा-अर्चना... हवन... यज्ञ के संग नवाह यज्ञ 7 नवंबर के शुरू भेल छल. एहि दौरान लगातार  जय श्यामा माई श्यामा माई श्यामा माई जय श्यामा माई  नामधुन संकीर्तन चलैत रहल.  नामधुन शुरू करय वाला मे काशीनाथ झा किरण...  सुष्मा झा...  ममता ठाकुर...  पारस पंकज... अनामिका जी संग कइटा कलाकार शामिल छलाह.

श्यामा माई के लेल होए वाला नवाह यज्ञ में दरभंगा... मधुबनी... सीतामढ़ी ...समस्तीपुर सं लsक नेपाल तक के लोक सभ पहुंचल छलखिन्ह. नवाह खूब धूमधाम सं भेल. एहि ठाम नौ दिन तक चौबीसों घंटा श्यामा माई के नामधुन के जाप होएत रहल. एहि दौरान लगातार हवन सेहो होएत रहल.

एहि् मंदिर पर आब सरकारी नियंत्रण अछि. सरकारी नियंत्रण मे ई तेसर नवाह यज्ञ छल. एहि मंदिर मे ई नवाह यज्ञ बीस साल सं बेसि सं भ रहल अछि.... तेइस साल सं. शुरू मे ई यज्ञ लोक सभ के कल्याण के लेल पांच साल धरि करय के संकल्प लेल गेल छल मुदा लोक सभ मे एकरा प्रति एतेक लगन... उत्साह... भक्ति कायम भ गेल जे ई आई धरि चलि रहल अछि. मां श्यामा न्यास समिति के ओर सं बनल आयोजन समिति एहि पूरा आयोजन के करौलक.
नवाह यज्ञ के दौरान चूंकि हमहुं दरभंगे मे छलहुं त एहन मौका हाथ सं केना जाए देतहुं. पहुंचलौ मंदिर.  मंदिर मे भारी भीड़. 


ठेलम-ठेल. जेम्हर जाउ ओम्हर भीड़े-भीड़. मंदिर के भीतर सं लs क बाहर तक. मुदा आयोजन समिति के लोक सभ के... मंदिर के भीड़ नियंत्रित करय वाला कार्यकर्ता सभ के देखि के लागल जे ओ भीड़ के आओर बढ़ाबय मे लागल छथि. हुनकर कोशिश ई नहि रहैन्हि जे लोक के कोनो असुविधा नहि होए... लोक नीक सं जल्दी-जल्दी दर्शन कs मंदिर परिसर सं बाहर चलि जाउथ... बल्कि ओ आओर एहन स्थिति पैदा करि रहल छलखिन्ह जेहि सं भीड़ एकहि ठाम अटकल रहल... धक्का-मुक्की होए... भगदड़ जका स्थिति पैदा होए. सभ किछ सिस्टमैटिक ढ़ंग से करय के जगह ओ सभ जबरन... ओहिना भीड़ बनौले छलाह.

एहिना हाल हमरा भंडारा... कुमारि भोजन... बटुक भोजन के दौरान सेहो देखय लेल मिलल... गेट के बाहर जतेक लोक के भोजन कराबय के छलन्हि करीब-करीब ओतबे लड़की सब ठाड़ छलीह ... मुदा गेट पर ठाड़ दू- तीन टा मुस्टंड टाएप के लोक सभ जबरदस्ती गेट के आधा सं बेसि बंद कs भीतर घुसय लेल भगदड़ टाएप के माहौल बना देलखिन्ह जेहि सं धक्का-मुक्की होए लागल

मेला मे एकटा चीज आओर देखय लेल मिलल जे जखन आयोजन समिति सं जुड़ल आ मंदिर सं जुड़ल कोनो प्रमुख लोक एम्हर- ओम्हर सं गुजरय छलखिन्ह त पांच-सात टा लोक हुनका एकदम सं राजा- महाराजा टाएप स्वागत करैत एक ठाम सं दोसर ठाम लs जाएत छलखिन्ह एहि क्रम मे ओ पांच-सातटा लोक मंदिर मे दर्शन करय लेल आएल लोक के धक्का देएत एकदम सं कात कs दैत छलखिन्ह... हुनका लेल पांच-सात फीट रास्ता बना दैत छलखिन्ह जेना कि लोक सभ सं सटला सं ओ छुआ जएथिन्ह. आजुक जमाना मे ई सभ देख अचरज सेहो भेल.

 जे होए लोक सभ एहि ठाम होए वाला यज्ञ... हवन...नामधुन के खूब आनंद उठएलाह. मेला-ठेला सेहो खूब जमल रहय. दस तरहक झूला... खेल ... तमाशा... पचासों तरहक दोकान... मिठाई... लकड़ी के सामान...  शिल्प... लोककला सं जुड़ल सामान...बच्चा सभ के लेल खिलौना... फैशन के सामान सं लs क झिल्ली... मुरही आओर जलेबी तक. सभ किछ मिल रहल छल.  ओना एहिठाम होए वाला हवन... यज्ञ के भस्म...विभूति लेबय लेल सेहो भीड़ लागल रहल. गरीब लोक सभ मे साड़ी... कम्बल सेहो बांटल गेल.

नवाह के समापन दसम दिन यज्ञवेदी के पूर्णाहुति सं भेल. मंदिर के प्रधान पुजारी साढ़े ग्यारह बजे हवन मे आखिरी आहुति द आओर बारह बजि के बीस मिनट पर संकीर्तन के संग एहि क्रिया के सम्पन्न कएखिन्ह. एहि अवसर पर लोक सभ जोरजोर सं श्यामा माई के जयघोष कएलखिन्ह.  अगर कोनो साल नवाह यज्ञ के दौरान दरभंगा दिस रहि त देखय लेल जरूर जाउ. नीक लागत.



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