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कोसी के एक साल ( एक )

18 अगस्त... मिथिला के लोक एहि तारीख के कहिओ भूलि नहि सकय छथिन्ह. बिहार के लेल शोक मानल जाए वाला कोसी एहि दिन सच मे लाखों लोक के लेल एकटा बड़का शोक लs क आएल. विनाश के एहन लीला एहिठाम कहिओ नहि भेल छल. ओना त एहि इलाका के लोक के लेल हर साल आबय वाला बाढ़ि के पानि एकटा नियति जका बनि गेल अछि. मुदा पिछला साल 18 अगस्त के जे भेल ओहन विपत्ति लोक के हाड़-मांस कंपा देबय के लेल काफी अछि.
ओना त पिछला साल आएल बाढ़ि मे सैकड़ो लोक डूबि गेलाह... सैकड़ों माल-मवेशी बहि गेल... हजारों लोक दहा गेलाह. मुदा सरकारी तौर पर देखल जाए त करीब साढ़े पांच सय लोक डूबि गेलाह... करीब पौने दू सय लोक के अखन धरि कोनो थाह-पता नहि छनि... 20 हजार सं बेसि माल-जाल बहि गेल. जे नहि रहलाह हुनकर आत्मा के भगवान शांति प्रदान करथुन्ह. मुदा जे बचि गेलाह हुनको जिनगी कोनो नरक सं कम के नहि रहल. परेशान लोक के त एतेक धरि कहनाय छनि जे अगर जीनाए एकरे कहय छै त एहन जिनगी सं मरनाए भला.
हाल त एहन अछि जे लोक पिछला साल के फेर सं यादों नहि करय चाहय छथिन्ह. किएक त ओकरा याद करला सं साल भर मे जे जख्म कनि भरल छनि ओ फेर सं फपदय लागय छनि... ओ फेर सं जिनगी मे हलचल मचा दैत छनि. 18 अगस्त 2008 के ओ दिन याद करनाय...कोनो तूफान के सामना करनाय सं कम नहि अछि. कुसहा मे बांध टूटला सं सुपौल... मधेपुरा... सहरसा... अररिया... आओर पूर्णिया के सैकड़ों गाम-घर एहा पानि मे बहि गेल जेना खर-पतवार... पुआल बहैत अछि. सड़क...पुल... रेलक पटरी सभ पानिक फोर्स मे कतs गेल तकर कोनो नामोनिशान नहि रहल.
गाछ-बिरिछ... घर-द्वार... दलान सभ दहा गेल... धारक आगां जे आएल सभ बहि गेल. कि कमजोर... कि बरजोर... कि हिंदू... कि मुसलमान... कि धनिक... कि गरीब... कि बच्चा... कि सयान... कि बूढ़. सभ बहि गेलाह. ककरो संग कोनो फर्क नहि. सभ घास-पात जकां बहि गेलाह. कोसी के पानि के एहन उफनैत धारि आई धरि लोक कहिओ नहि देखने छलखिन्ह.
दोसर भाग

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