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बाढ़ि-सूखा : आखिर कहिआ तक ?

बिहार मे हर साल बाढि सं भारी तबाही होएत अछि.  माल-जाल के भारी नुकसान होएत अछि.  अगर कोनो साल बाढ़ि नहि आएल त सूखा त अछिए.  किसान...आम लोक के कोनो तरह राहत नहि.  एक सं बचलौं त दोसर सं जकड़लौं.  आखिर आजादी के एतेक साल बाद बिहार मे बाढ़ि... सूखा के स्थायी उपाय किएक नहि ढूंढल गेल ?... सिंचाई के स्थायी उपाय अखन धरि किएक नहि कएल गेल अछि? कि बाढ़ि... सूखा के अएला पर राहत-बचाब के नाम पर लूट-खसोट के लेल ऐना भs रहल अछि कि ?  राहत बचाव के नाम पर राजनीति किएक कएल जाएत अछि?  जखन धरि बाढ़ि नहि आएल रहत कहताह सभ ठीक अछि... अएला के बाद दस तरहक बहाना बना देताह.  आखिर ई सभ कहिआ तक चलत.  लोक कहिआ तक मरैत रहत ?  लोक कहिआ धरि बुनियादी सुविधा तक के लेल कहरैत रहत ?  बाढ़ि आएत अखन... आओर राहत मिलत अगिला साल.  एहन राहत के कि फायदा ?  एहि सभ के लेल के जिम्मेदार अछि ?   सरकार... प्रशासन... स्थानीय नेता या आम लोक ?  जे जेहिना छी तेहिना  पड़ल रहय छथि.  कोनो शिकायत नहि करय छथि.  जे सरकारी लापरवाही... भ्रष्टाचार... रिश्वत... प्रशासन के सुस्ती पर अपनो खुद सुस्त पड़ल रहय छथि. कोनो आवाज नहि उठाबय छथिन्ह. अपन विचार जरूर राखब.  कमेंट लिखु या फेर मेल करु hellomithilaa@gmail.com
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