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कॉमन सेंस... 1

कई बेर अहां... हमरा सभ के संग एहन होए छै जे नहि होबाक चाही. बच्चा मे कइटा बात एहन छल जे घर के संग-संग स्कूल मे सेहो बताएल जाएत छल जे एना नहि करs त ओना नहि करs. जेना अपना सं बड़ के सम्मान करबाक चाही... सत्य बोलबाक चाही... चोरी नहिं करबाक... ककरो दुख नहि पहुंचयबाक चाही... लोक के मदद करबाक चाही... सड़क पर बायां कात चलबाक चाही. गंदगी नहि फैलयबाक चाही. ई सभ नैतिक शिक्षा के रूप मे सेहो पढ़ाएल जाएत छल. एहन मैनर... कॉमन सेंस के बात लोक रोज -रोज के अनुभव सं सेहो सीख लैत अछि जे कि करबाक चाही आओर कि नहि. कोन चीज लोक के पसंद आएत कोन नहि. कोन चीज करला सं लोक के सुविधा होएत आओर कोन चीज सं लोक परेशानी महसूस करताह. मुदा दिल्ली अएला के बाद रोज किछ न किछ एहन होएत अछि जे मुंह सं अनायास निकलि जाएत अछि कॉमन सेंस इज नॉट सो कॉमन. जेना चारि लोक गप करय छी ओहि मे नाक मे आंगुर करय लगलहुं. कतहुं ठाड़ भs लग्घि करय लगलहुं. दस लोक लाइन मे ठाड़ छथि आओर अहां लाइन तोड़ि सभसं आगां जा ठाड़ भ गेलहुं. एकदम चालू रोड पर पांच टा लोक गप लड़ाबैत बीच मे चलि रहल छी. हम आई सं एहि पर एकटा कड़ी शुरू कs रहल छी जेहि मे कॉमन सेंस वाला गप होएत जकरा हम-अहां रोज झेलैत छी.
एक बेर त एहन भेल जे सूचना प्रसारण मंत्रालय मे निदेशक स्तर के एकटा हमर मित्र दिल्ली सं घुमय नोएडा दिस अएलाह. सोचलाह हमरा सं मिलैत चली मुदा ओहि दिन हमर ऑफ छल. पहिने हम बुध दिन ऑफ लैत छलहुं. न्यूज चैनल मे चौबीसों घंटा काज होएत अछि एहि लेल सभ लोक अपन -अपन ऑफ अलग-अलग लैत छथिन्ह. ओ हमरा फोन कएलाह जे हम अहांक ऑफिस के बाहर ठाड़ छी आओर अहां लेल नबका साल के डायरी सेहो लेने आएल छी. हम हुनका कहलिएन्हि जे आई त हमर ऑफ अछि. जहां तक डायरी के गप अछि त हम एकटा लड़का के कहि दैत छी ओ अहां सं लs लेत. हम ऑफिस मे डेस्क पर के एकटा सहकर्मी संजीव दूबे जी के हुनका सं भेंट क डायरी ल लेबय लेल कहलिएन्हि. संजीव जी के इहो बता देलएन्हि जे ओ केहन लोक छथिन्ह आ हुनकर जे स्वागत-सत्कार होबाक चाही से कs देब. संजीव जी डायरी लs वापस न्यूज डेस्क पर चलि अएलाह. काज करय लगलाह. मुदा हमरे संग काज करय वाला एकटा छलाह संजय सिन्हा जी. ओ संजीव सं पूछलखिन्ह किनकर डायरी छनि. संजीव हमरा बारे मे बतएलखिन्ह. मुदा संजय सिन्हा ओ डायरी ल अपना तरफ सं एकटा लड़की के प्रजेंट कs देलखिन्ह. ई जानतहुं जे ई डायरी हितेंद्र जी के कोई प्रजेंट कएने छनि. अगिला दिन हमरा एहि बातक पता चलल. दुख सेहो भेल. मुंह सं अनायास निकलि गेल जे कॉमन सेंस इज नॉट सो कॉमन. संजय सिन्हा जी आई काल्हि आजतक मे छथि. ओना हम संजय जी सं कोनो शिकायत नहिं कएलिएन्हि मुदा जखन हुनकर चर्चा होएत छनि हमरा ई गप याद आबि जाएत अछि.
अहां सभ के संग सेहो जरूर एहन किछ नहिं किछ घटैत होएत. अहां ओकरा लिखि क हमरा पास भेज दिअ.

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