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वट सावित्री


पति के आयु के लेल करय जाए वाला लोक आस्था के पर्व वट सावित्री रवि दिन मनाएल गेल. एहि पावनि मे पति के रक्षा... आयु के लेल वट वृक्ष... बरगद के गाछ के पति मानि कs पूजल जाएत अछि. अपना दिस एकरा बरसाइत सेहो कहल जाएत अछि. विवाहित स्त्री... मां... बहिन सभ पूजा के थाल लs पंखा के संग वट वृक्ष के पास जाए छथिन्ह. वट वृक्ष के चारु कात रक्षा सूत्र बांधय छथिन्ह आओर पंखा सं हवा करय छथिन्ह. मानल जाएत अछि जे वट सावित्री के पूजा कएला सं सात जन्म धरि सुहागिन रहय के आशीष मिलैत अछि. पूजा के बाद सत्यवान आओर सावित्री के कथा सेहो सुनाएल जाएत अछि.
वट सावित्री के दिन नवविवाहिता सभ मे उत्साह देखते बनैत अछि. सोलहो श्रृंगार कs गाम घर से सभ मां... बहिन... भौजी... काकी सभ वट सावित्री लग पहुंचि पूजा करय छथीह. नव-नव कपड़ा लत्ता मे सभ किछ नव बुझाएत रहैत अछि. उपवास सेहो राखय छथीह. खएबो करय छथीह त बिना नून के...फीका... मिष्टान सभ...फल सभ. खीर बनाएल जाएत अछि. नवविवाहिता सभ के त सासुर सं पूरा भार-चंगैड़ा आबैत अछि. ओहि मे साड़ी आओर कपड़ा संग श्रृंगारके सामान सभ रहैत अछि. पूजा के सामान रहैत अछि. नीक घर मे गहना-गुड़िया सेहो आबैत अछि. सासुर के कपड़ा पहिन पूजा करय जाए छथिन्ह. रंगीन धाना के रक्षा सूत्र बांधि गाछ सं गला मिलि... प्रणाम करि घर आबि जाए छथिन्ह. कई ठाम जतय महिला सभ वट वृक्ष के पास नहिं जा पाबय छथिन्ह ओ गाछ के टहनी तोड़ि आंगन मे रोपी पूजा क लैत छथिन्ह. जेना दिल्ली सन टाउन मे छठ पार्क मे मना लेल जाएत अछि.
एहि पावनि मे गाम घर मे त नव विवाहिता के पति सेहो आबय छथिन्ह. पाहुन सभ लाल धोती... उज्जर रेशमी कुर्ता... लाल पाग पहिन पूजा के दौरान संग रहय छथिन्ह. पूजा के बाद फुलाएल चना... हलवा... फल प्रसाद मे देल जाएत अछि. महिला सभ अपन -अपन खोइंचा मे ई प्रसाद लs घर जाए छथिन्ह.



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2 comments:

  1. अरे! कितनी मीठी भोली है या भाषा, क्या कहूँ! बहुत अच्छी पोस्ट!
    हिंदी में प्रेरक कथाओं और संस्मरणों का एकमात्र ब्लौग http://hindizen.com ज़रूर देखें.

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  2. धन्यवाद निशांत मिश्र जी

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