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गया मे पितृपक्ष मेला शुरू


गया मे पितृपक्ष के मेला शुरू भs गेल अछि. एहिठाम फल्गु नदी के कात मे श्राद्ध आओर तर्पण कएल जाएत अछि. शास्त्र मे मनुष्य केर लेल तीन प्रकार के ऋण बताएल गेल अछि... देवऋण... ऋषिऋण आओर पितृऋण. स्वाध्याय सं ऋषिऋण... यज्ञ सं देवऋण आ
ओर श्राद्ध...तर्पण सं पितृऋण सं मुक्ति मिलैत अछि. एहि तीनु सं मुक्ति बिना व्यक्ति केर कल्याण नहिं होएत अछि. एहि मुक्ति के लेल... मोक्ष केर लेल... गया मे भाद्रपक्ष मास केर शुक्लपक्ष पूर्णिया सं 17 दिन चलय वाला पितृपक्ष मेला शुरू भ गेल अछि. एहि ठाम भोर मे नहा-धुआ कs तर्पण कएल जाइत अछि... फेर श्राद्ध केर पिंडदान कएल जाएत अछि. श्राद्ध केर समाप्ति पर पिंड के या त गाय के खिला देल जाएत अछि या फेर नदी मे बहा देल जाएत अछि. पिंडदान केर बाद भगवान विष्णु गदाघर केर दर्शन कएल जाएत अछि. गया मे श्राद्ध कर्म के दौरान चारि टा काज होएत अछि...हवन...पिंडदान...तर्पण आओर ब्राह्मण भोज. ई सभ काज एहिठामक पंडा सभ कराबैत छथिन्ह. कहल जाइत अछि जे लोक मरि गेल छथिन्ह ओ पितर के लोक जाइ छथिन्ह आओर हुनकर आत्मा केर शांति के लेल... मोक्ष केर लेल श्राद्ध...तर्पण करनाय जरूरी अछि.
ितृपक्ष मेला केर ई स्थान पटना सं करीब सय किलोमीटर दूर अछि. हर साल पितृपक्ष मे एहिठाम भारी मेला लगैत अछि. चूंकि ई मेला गया मे लगैत अछि एहि लेल एहि मेला के स्थानीय लोक सभ गयाजी मेला सेहो कहैत छथिन्ह. ओना त एहिठाम लोग तर्पण... श्राद्ध के लेल साल भर आबैत रहैत छथिन्ह मुदा पितृपक्ष के दिन मे किछ बेसि भीड़ रहैत अछि. मृत्यु के बाद कएल गेल पिंडदान श्राद्ध कर्म मानल जाएत अछि आओर जेहि दिन माता-पिता केर मृत्यु होइ छन्हि ओहि दिन श्राद्ध करनाय के विशेष महत्व अछि. मेला के समय मे सरकार के तरफसं सेहो नीक इंतजाम कएल जाइत अछि. गया जाए- आबए के लेल बस... ट्रेन आ दोसरो गाड़ी के नीक व्यवस्था रहैत अछि. स्पेशल ट्रेन सेहो चलाएल जाइत अछि.

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