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बाढ़ि मे पक्का मकान


बिहार मे आएल भीषण बाढ़ि सं एतेक दिन भेलाह के बादो लोकक परेशानी कम नहि भेल अछि.   कई ठाम त परेशानी आओर बेसि भs गेल अछि.   रहय खाय के दिक्कत त अछिए आब महामारी के आशंका सेहो खाड़ भs गेल अछि.  पानि जखन तक बहैत रहैत अछि... साफ रहैत अछि... मुदा थमला के बाद ओहि पानि मे सड़न आबि जाइत अछि.  ओहि पानि सं दस तरहक बीमारी फैलय लागैत अछि.   पानि के जमला सं पेट केर बीमारी बेसि होएत अछि.  लोक सभ ओतेक दिन भूखल- पियासल पानि मे फंसल रहला ताहि सं कमजोर सेहो भ 

गेल छथिन्ह.  आ कमजोर लोक पर दस तरहक बीमारीक हमला होएत अछि.   लोक मे रोग सं लड़य केर शक्ति नहिं बाचल रहैत अछि.  सरकार आ एनजीओ के तरफ सं जे किछ खाय पिबय लेल राहत केर सामान बांटल जा रहल अछि ओहि मे पौष्टिकता केर कमी सेहो रहैत अछि,  ओ त भूखल लोक के भूख मिटाबय के रहैत अछि... ताहि लेल जे मिलल खा लैत छथिन्ह.
                                             ओना एम्हर पानि किछ कम होय के खबर मिलल अछि.   पानि कम भेलाह सं किछ लोक घर दिस लौटय के कोशिश सेहो कs रहल छथिन्ह मुदा अखन बरसात के मौसम खत्म नहिं भेल अछि ताहि लेल वापस जनाय नीक नहिं रहत.   बांध के मरम्मत मे अखन तीन- चारि महीना केर समय लगि सकैत अछि. तखन धरि पानि सेहो खत्म भ गेल रहत.   मुदा एकटा बात एहि दौरान सामने ई आएल अछि जे जाहि इलाका मे पक्का मकान सभ छल ओहि इलाका मे कम नुकसान भेल अछि.   मुदा 
बिहारक... मिथिलाक ई इलाका सभ सं पिछड़ल रहल अछि.                                                                                                     
ओना त पूरा बिहारे पिछड़ल अछि.
 मुदा ई इलाका किछ बेसि अछि.   कोसी के कहर के कारण एहि इलाका सं शुरूए सं लोकक पलायन जारी अछि.   एम्हर के लोक सभ दिल्ली... कलकता...बम्बई जा क बैसि गेलाह अछि.  रोजी- रोटी के लेल पंजाब सं ल क हरियाणा दिल्ली तक चलि गेलाह .   पिछड़ल इलाका होबाक कारणे...  उद्योग धंधा नहिं के बराबर होबय के कारणे... लोक खेती पर निर्भर छथिन्ह.   मुदा हर साल आबय वाला बाढ़ि के कारण किसान... जन- मजदूर... सभ कर्ज के जाल मे फंसल रहय छथिन्ह.  कर्जक जाल सं मुक्ति केर लेल बेटा... भाई के पंजाब दिल्ली भेजय छथिन्ह.  पंजाब दिल्ली से जे पाई जाइत अछि ओहि सं कोनो तरहे गुजारा भ पाबैत अछि.  पाई बचि नहिं पाबैत अछि ... त सवाल अछि केना बनत पक्का मकान.  आ पक्का मकान नहि बनल ताहि कारण खर-फुस केर ... मट्टि केर मकान पानिक तेज धार मे बहि गेल.  घर- दोआर के संग लोक... माल... जाल सभ बहि गेल.    दु -चारि लोक जिनकर घर पक्का... छत वाला छलन्हि ओ सभ कनि सुरक्षित रहला... छत पर रहला.   हेलीकॉप्टर सं हुनका पास जल्दी मदद सेहो पहुंचल.


2 comments:

  1. कुछ समझा कुछ समझ न पाया .

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  2. Which Kosi playing disaster?

    Natural Kosi or political Kosi
    Vijay Deo Jha

    Dear Hitendra ji I read the entire blog where you have depicted the suffering of humanity. I also read the article of Ravishji and I appreciate your concern but I am forced to write some hidden fact. Kosi with her unchecked flow has played havoc with the people of this region. I make a difference between Kosi as a natural river and Kosi as a political river. Sound absurd! Me too.

    Every time flood takes toll on the life of people and the both central and state governments affirm to take a decisive actions to control the flood. Things go on like that and we the people of Mithilanchal prepare ourselves for the next calamity.

    It is no time of chest beating or staging Rudali. We the people of this proud region live in amnesia. We tend to forget the injustice partiality the political party played with us. We do not have qualm if our Mithilanchal is being trampled and kept backward for some political and PERSONAL GRUDGE.

    If I am not wrong and kindly correct if there is some discrepancy in the fact that the then British Government had planned for an effective embankment of the river Kosi and created a corpus of Rs. 50 Crores for that. The project was shelved during the rule of Pandit Nehru. The same funds were diverted for the construction of Bhakra Nangal Dam in Punjab after the great famine in this reason. The people of this region (women) gheraod the PM who diverted the fund meant for the construction of Kosi dam. The interest of Mithilanchal was sacrificed for the benefit of Punjab.

    No Congress crying and Lalu Rama can solve our problem. The Congress which feels so much pain and sent Rahul Baba for the moral boost up of the flood affected people might not be aware of the mischief that her grand ma and great grand father played with Mithilanchal. There was only tall figure in Mithila- late Laxam Jha who had the temerity to expose Mrs. Gandhi. This man of his model (Maithili people love to call him Batah, mad as a mark of reverence) started campaign to for a permanent solution to this problem and advocated the canalization and proper embankment of Kosi.

    The cunning Congress headed by late Lalit Narayan Mishra, former Railway Minister started a whisper campaign against Jha and termed him a lunatic who was playing with an absurd idea of taming river Kosi. Congress might have forgotten this. Please do not cut a sorry figure and do not feel ashamed off Congressmen if I made you to remember you your hoary past.




    Vijay Deo Jha
    Correspondent
    The Pioneer
    Ranchi
    91 9470369195

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