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अभावक सुख...

बरसातक मौसम चलि रहल अछि... सब किछ हरियाइल अछि... चारूकात हरियरी देखि मन खुश भs जाइत अछि. मन करैत अछि जे खेत...गाछी दिस घुमिते रहि...हरियरी के देखिते रहि... खेत में धानक हरियर बीया... आमक गाछी में हरियर...पीयर आम. एम्हर...ओम्हर...जिम्हर देखु चारूकात या त पानि या हरियरी...रंगबिरंगा फूल... पोखरि... डबराक कात में में बंसी लs क माछ पकड़ैत लोक. बड़ धैर्यक जरूरत होइछै एकरा लेल. शांति सं बैसल रहु माछक इंतजार में. सभ किछ भूलि. ई काज सभ सं नहिं भs सकैत अछि. अहां ओतेक देर एकटा माछ लेल इंतजार करिए नहिं सकय छी. एको पाव माछ भेल कि मस्त. कोनो चिंता फिकिर नहिं. एहिना अपन मिथिला सभस शांत... संतुष्टि वाला जगह नहिं अछि ? सभ अपना में मस्त. झगड़ा भेल त दोसरा के लागल झड़नीए भs रहल अछि. चूड़ा-दही... माछ-भात खाके मस्त रहनाय दुनिया मिथिलाक लोक सं सीख सकैत अछि. गाम में नहिं किछ रहितो लोक जतेक मस्त रहैत छथि... शहर अएला पर सब किछ रहितो ओतेक खुशी नहिं मिलैत छन्हि. किछ त जरूर एहन छै गामक माटि में जे अभाव में... परेशानी में...कष्ट में... फाटल अंगा में... टूटल चप्पल में... चुअइत छप्पड़ में...भसकल दलान में... कादो पानि में भगवान महादेव जकां मस्त रखैय छन्हि. कम आमदनी... कम पैसा- रूपयो में लोक खुश छथि. बाजार के असर बेसि नहिं पड़ल अछि. ई नहिं छै जे गाम में आ दिल्ली बम्बई में साबुन... सर्फ... डीजल... पेट्रोल... गैस... खाद... सीमेंट... तेल... मसाला... चावल... दाल के दाम में कोनो अंतर छै. किछ मामला में त गाम में दाम बेसि छै तखनो गाम लोग शहरक लोक सं बेसि चिंता फिकिर सं मुक्त रहैत छथिन्ह. भs सकैत अछि एकर एकटा कारण संयुक्त परिवार सेहो होय. दादा-दादी...काका-काकी...भैया-भौजी...दीदी...पीसी सभ लोक के संग संग रहय के कारणे परिवार...लोक के एकटा सुरक्षा के भाव रहय छै. एकोटा आदमी के कमयला पर पूरा परिवार के भरण पोषण होइत अछि. सभ मिलि-जुइल... बांइट-चोंइट के कमाय खाय छथि. एक आदमी के दुख दोसरो के दुख होइत अछि. आ जखन दुख बंटय छै त कम भs जाइत अछि आ सुख बांटला पर बढैत अछि. आ मिथिलाक गाम घर के लोकक सुखी होनाय के एकटा कारण इहो छै जे ओ सुख के एक दोसरा सं बांटय छथिन्ह. मिलि-जुइल के रहय छथिन्ह. ई बात शहर में नहिं होइत अछि. एके ठाम रहलो पर मम्मी डैडी एकटा फ्लैट में...बेटा-पुतोहु दोसर फ्लैट में... बेटी-दामाद तेसर फ्लैट में ककरो सं ककरो कोई लेना देना नहिं. बर्तन-बासन सभ अलग. एहन में दुख -सुख बंटत केना. दुख बंटत नहिं क कटत केना आओर सुख बंटत नहिं त बढ़त केना.

4 comments:

  1. are vha bada sundar likh rhe hai. badhai ho.

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  2. Deonagri font ke subidha nai acchi tahi karne roman me likhi rahal chhhi. apne k lekh padhal aa neek lagal. katbo abhav aa garibi ho apan gaam aa desh appan hoit acchi

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  3. sahi kahal. abhavak sukhak apan mojar hoit chhaik, mudaa abhav nostalgia nayi bh' jaae, i maryaada rekha paarab badd aavashyak. kio abhav me rah' nayi chahai chhai, muda okaraa s nikalalaak baad okar prashasti -gaan - mon ke udvelit karait achhi je yadi o sabh etabe priy chhal t' okara s' baahar ayabaak prayas ham sabh kiyaik kael?

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  4. ठीके कहलहुँ हितेन्द्रजी, ताहि लेल ने बूढ़ माय-बाप बसंत-विहारमे रहैत छथि आ' बेटा-पुतोहु बगलमे गुरगाँवमे अलग रहैत छथि। आ' घटना-दुर्घटना घटित होइत रहैत छन्हि।

    গজেন্দ্র ঠাকুব

    http://www.videha.co.in/

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