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ऑर्कुट पर हमर ज्यादातर मित्र... दोस्त पत्रकारिता लाइन में आबय चाहय छथिन्ह. नीक बात छै जतेक लोक अपन दिस सं अयताह अपन इलाका के विकास में ओतेक ज्यादा भागीदार होयताह. मिथिलाक सभ्यता... संस्कृति... परम्परा... लोक कथा के ओतेक आगां बढ़ा पयताह. तं सभ संगि लोकनि सं हमर इहे कहनाय छैनि जे अगर अहां एहि क्षेत्र में कदम बढ़ाबय चाहय छी... सफल होय चाहय छी त एकरा लेल सभसं पहिल आओर खास बात अहां में होबाक चाहि ओ अछि लेखन प्रतिभा.. अहांक लेखन शैली जतेक रोचक, सुन्दर होयत. आगां बढ़य के चांस ओतेक ज्यादा होयत. कामयाबी अहांके ओतेक जल्दी मिलत.
ओना कइटा लोक अहांके ऐहन मिलता जिनका देखि लागत कि हुनका में लेखन प्रतिभा जन्मजात छनि. लगत कलम में मां सरस्वतीक निवास छनि. ओ किछुओ लिखय छथिन्ह त नीके होइछ. मुदा जिनका में एहि तरहक बात नहिं छैन ओ दिन राति अभ्यास कए... दिन राति लिखैत-लिखैत एकरा हासिल कए सकैत छथि. जतेक बेसि लिखब अहांक लेखन ओतेक सुरुचिपुर्ण होयत... लोकक नस पकड़य में अहां ओतेक कामयाब होयब... हां किताब लिखय के होय तं साहित्यक पुट ज्यादा भारी भरकम शब्दक उपयोग... इस्तेमाल कय सकय छी... मुदा अगर लेख... पेपर...टीवी के लेल लिखय के होय त कोशिश करु कि ओ आम बोलचाल के भाषा में होय... लागय कि अहां पाठक...दर्शक सं सीधा बात कए रहल छी... दुनु आमने सामने छी. भने एक दुटा संस्थान में नौकरी नहिं मिलय मुदा अहां में लेखन प्रतिभा रहत त तीसरका संस्थान अहां के नौकरी... काज जरूर देत. एकरा लेल अहांके अपन पुरा लगन, उत्साह, उमंग आ आत्मविश्वास के संग काज करय पड़त.
अहां पत्रकारिता के एबीसी नहिं जानय छी कोनो बात नहिं... अहां के कि आबय अ...अहांक सभसं ज्यादा इन्ट्रेस्ट कोन क्षेत्र में अई. खेल में... फिल्म देखय में... चाय दोकान पर राजनीति पर गप्प मारय में... फोटो खिंचय में... गाड़ी के बारे में... कोन चीज में अहांक इन्ट्रेस्ट अछि ??? ...अहां ओहि क्षेत्र में आउ न... सभ तरहक पत्रकार के जरूरत छै. अहां खेल पर... फिल्म पर... राजनीति पर... फोटो फीचर पर ... ऑटो पर... फैशन पर... पेज थ्री कोनो विषय पर लिख सकय छी... अहां जाहि चीज सं जुड़ल छी ओहि में हाथ अजमा सकय छी. ओकरा बारे में रोज किछ किछ लिखैत रहु. कोनो दोस्त... पत्रकार सं देखबा लेल करु. पेपर मैगजीन में अहां अपन लगाव वाला विषय पर पढैत रहुं आओर देखिऔ कि केना लिखल गेल छै... चूंकि अहां ओहि क्षेत्र सं जुड़ल छी ताहि लेल अहां ओकरा सं जुड़ल टर्म के सेहो जाइनते होयब. कोनो खास दिक्कत नहि आयत. आई काल्हि हर खास चीज पर अलग अलग मैगजीन..पेपर निकलय लागल अ. टीवी में सेहो सभं विषय पर लोक के राखय जाय लगल अछि. एहि लेल ढेरों मौका मिलत...सिर्फ ओकरा पकड़य के बात छै. दिक्कत होय तं बाजार सं कोनो पत्रकारिता पर किताब खरीद बेसिक जानकारी ल सकय छी. हमरा मेल कय सकय छी... फोन पर बात कय सकय छी. नौकरी नहिं दय सकब मुदा रास्ता द बताए देब .आगा ईश्वर के मर्जी.

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