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म्यूचुअल फंड में निवेश

शेयर बाजार में उठापठक जारी छै...पी नोट के असर अखन तक कम नहिं भेल अ...जिनका बाजार में समझि छैन हुनका लेल त कोनो दिक्कत नहिं...मुदा नवका लोक के लेल त बाजार के उतार-चढ़ाव जानमारुक छै...आई शेयर बाजार के बढ़ला पर पाई लगैलऔ नहिं कि दोसर दिन बाजार धम्म सं नीचा खसि पड़ल..आब कि करल जाई...सीधा फंडा छै अगर अहां के बाजार के गणित समझि में नहिं आबैत अछि त ओकरा छुबय के कोशिश नहिं करू...अहां के लेल बाजार में घुसय के दोसर रास्ता छै...ओ छै म्यूचुअल फंड के...
आब अहां कहवय जे ई म्यूचुअल फंड की छै त..ई बाजार में पाइ लगाबय के दोसर तरीका छै..एहि में एकटा फंड हाउस या कंपनी जे कहिऔ होयछ...ओ बाजार में कोनो फंड लाबय छै...फंड के देखरेख करय लेल फंड मैनेजर होय छै...एहि में एक आदमी के नहिं कई आदमी के पाई एक ठाम जमा कए क बाजार में लगायल जाई छै...एहि में अहांक निवेशक ऊ फंड मैनेजर पर निर्भर रहय छै...ओ फायदा..नुकसान के हिसाब रखि शेयर में निवेश करय छथिन्ह..आओर ज फायदा..नुकसान होइछ ओकरा सभ पाई लगाबय वाला में बांटि देल जाइछ...शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड के जे दाम होइछ ओकरा नेट असेट वैल्यू...एनएवी कहल जाइत अछि...
बाजार में कई तरहक म्यूचुअल फंड छै..बाजार में शुरू में जब कोनो फंड आबय छै..त ओकरा इनिशियल पब्लिक ऑफर...आईपीओ कहल जाइ छै...फंड के बारे में पुरा जानकारी ओकर ऑफर डॉक्युमेंट रहय छै..अगर अहां चाहय छी की अहांक पाइ सुरक्षित रहय त एकरा ध्यान सं पढनाय जरूरी रहय छै..एहि में फंड के बारे में सभ जानकारी अहां के मिलत...रिस्क फैक्टर, लोड ...एंट्री लोड... एग्जिट लोड... स्विचिंग चार्जेज...दोसर खर्च, असेट अलोकेशन केना होयत..इक्विटी फंड छै कि बैलेंस्ड फंड...ओपन एंडेड छै कि क्लोज एंडेड. एकरा संगहि इहो देख लेल करु जे एहि सं पहिने उ कंपनी..फंड हाउस के प्रदर्शन केहन रहल अछि...
साफ छै जे बाजार में घुसय सं पहिने पुरा सावधानी बरतय के जरूरत छै...फंड मैनेजर अहां के पाई के देखरेख करय लेल छै...ओकरा ओहि लेल पाइ मिलय छै...ओ बाजार पर नजर रखय छै आओऱ बाजार के नब्ज के समझय छै...अहां अगर बाजार में ओना पाई लगायब त भ सकय अ बढिया शेयर में पाइ नहिं लगा पायब..किएक त बढिया कंपनी...ब्लूचिप शेयर के भाव बहुत ज्यादा रहय छै.. एकर उपाय म्यूचुअल फंड छै...म्यूचुअल फंड अहांक पाइ के ऊ बढ़िया-बढ़िया मजबूत कंपनी के शेयर में लगाबय छै जकरा बारे में ऊ समझय छथिन्ह जे आगा जा क मुनाफा देत...एहि में हजार आदमी..लाख आदमी के पाइ एक जगह जखन जमा हो जाइछ त इ पाई के फंड मैनेजर किछु नीक कंपनी में लगा दैत छथिन्ह... अगर 65 फीसदी सं ज्यादा इक्विटी में पाइ लगायल जाइ छै..त ओकरा इक्विटी फंड कहल जाइछ..जहि में इक्विटी आओर डेट..ऋण फंड में बराबर निवेश कएल जाइछ ओकरा बैलेंस्ड फंड कहल जाइछ...आओर एक लाख रुपया सं कम पाइ लगाबय वाला के छोट निवेशक मानल जाइत अछि...एकटा बात आओर एक साल यानी 365 दिन सं ज्यादा के निवेश लॉग टर्म में आबि जाइत अछि आओर ओकर टैक्स में फायदा सेहो छै..
जखन पाइ लगाबय के अछि त ध्यान रखु जे कम स कम तीन साल के लेल जरूर पाइ लगायल जाय...ओना जतेन दिन ज्यादा रहत फायदा ज्यादा रहत...लेकिन ओहि फंड पर..ओकर ट्रेक रिकॉर्ड पर नजर जरूर राखु कि ओ नीक क रहल छै कि नहि..अगर ओकर प्रदर्शन ठीक नहिं छै त ओकरा निकाल दोसर नीक फंड में पाइ लगा लिय..म्युचुअल फंड के एकटा सभस नीक बात ई छै जे अहां एहि में किस्त में पाइ जमा क सकय छी...सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान...एसआईपी के माध्यम सं... एहि में अहां साल में एक बेर ज्यादा पाइ जमा नहिं क...हर महीने..हर तीन महीना पर पाइ जमा कर सकय छी...अहां पांच सय रुपया सं शुरू कय सकय छी...एसआईपी के माध्यम सं पाइ लगयला पर बाजार के उतार चढाव के जोखिम कम भ जाइ छै... जखन बाजार उपर रहय छै तखन त ठीक छै...अगर नीचा गेल त ज्यादा यूनिट मिल जाइछ...आओर सभ जोड़ि के देखल जाइ..औसत निकालल जाइ त एक बेर पाइ लगएला के तुलना में ई नीक रहय छै...एक बात आओर ध्यार रखय के छै जे अपन सभ पाइ एके टा शेयर..म्यूचुअल फंड में नहिं लगाउ...दु तीन टा नीक फंड के देखि पड़खि पाइ लगाउ...फंड के नाम पर नहिं जाउ..कंपनी के पहिने के प्रदर्शन...ओकर फंड मैनेजर के अछि...फंड हाउस मजबूत छै कि नहिं सभ देखि पाइ लगाउ... ओना कम उम्र स पाउ लगयला पर रिटायरमेंट पर ज्यादा पाइ मिलय छै...
बाजार में रिलायंस...एसबीआई..फिडेलिटी..एचडीएफसी...आईसीआईसीआई...आओर कइटा नीक फंड हाउस छै जे निवेशक के नीक फायदा द रहल छै...जखन कोनो नवका फंड आबय छै त ओकर विज्ञापन अखबार...टीवी पर सेहो आबय छै...ओकरा बारे में नीक सं जांच-परख कय पाइ लगाउ...शुरू के कनि सावधानी अहां के हमेशा के लेल सुखी रखत...किएक त अहां बाजार में कमाई लेल पाइ लगा रहल छी नहिं कि दांव पर लगा रहल छी...त कनि होशियारी..सावधानी दिखाउ आओर चैन सं रहुं.

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