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अहिंसा दिवस


दु अक्टूबर अखन धरि गांधी जयंती के रूप में मनायल जाइत छल...मुदा आब ई भारतहि के लेल नहिं दुनिया भर के लेल खास दिन भ गेल अछि...दुनिया भर में आई २ अक्टूबर अहिंसा दिवस के रूप में मनायल जा रहल अछि. एहि सं गांधी जी के सत्य आओर अहिंसाक संदेश आओर मजबूती से ऊभरल अई. आतंकवाद स जूझि रहल दुनिया के मानय पड़ल कि अंहिसा स बड़का कोनो धर्म नहिं...एकरा स बढ़िक कोनो हथियार नहिं.

दुनिया में आई काल्हि जे मारि-काटि मचल अई...हथियारक होड़ मचल अई... खून खराबा भ रहल अई...चारू कात अशांति फैलल अई...एहि में गांधीजी के विचार सभस कारगर अई...आखिर देर सबेर संयुक्त राष्ट्र के सेहो मानय पड़ल जे सत्य, शांति आओर अहिंसा एहन डोर अई जकरा स दुनिया के एक सूत्र में बांधल जा सकय अ.

भारत में हम सभ त कहिते छलहुं...आब दुनिया के सेहो कहय पड़ल जे गांधीजी के संदेश...आदर्श...विचार आईओ प्रासंगिक अई...ओना बापू के बतायल सत्य, शांति

आओर अहिंसा केर रास्ता पर चलनाय आसान नहिं अछि....ई रास्ता जतय देखय में आसान अछि ओतेक अछि नहिं...एकरा लेल दृढ़ संकल्पशक्ति के जरूरत छै...ओकर बिना ई संभव नहिं...ऊ त राष्ट्रपिता बापूए छलाह जे शुरू सं अंत धरि अपन सिद्धांत पर टिकल रहला...चलैत रहल...आओर ई साबित क दिखयलाह जे अन्याय...हिंसा केर विरोध हथियार स नहिं अहिंसेS सं भ सकैत अछि...ओना बापू के सत्य अहिंसा में कतेक ताकत छई ई बात अंग्रेज स नीक आओर के समझि सकय अ जकर सत्ता के बापू उखारि फेंकलथिन्ह.

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