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अपन मिथिला


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


मिथिला प्राचीन काल में एकटा राज्य छल. आई-कालि उत्तर बिहार आओर नेपाल के तराईइलाका के मिथिलांचल नाम जानल जाइत अछि.. मिथिलाक लोकक भाषा मैथिली अछि. धार्मिक ग्रंथ में सबसे पहिल इकर उल्लेख रामायण में मिलैत अछि. दरभंगा,मधुबनी,समस्तीपुर,मुजफ्फरपुर,सीतामढी,जनकपुर,पूर्णिया,सहरसा,कटिहार, राजबिराज, बिराटनगर मिथिलांचलक प्रमुख शहर अछि...मैथिली के पहिने मिथिलाक्षर लिपि में लिखल जाइतछल जे बांग्ला मिलैत अछि...मुदा आब ज्यादा लोकनि देवनागरी में मैथिली लिखैत छथिन्ह...

विद्यापति मैथिलीक आदिकवि आओर सर्वाधिक ज्ञात कवि छथि...विद्यापति साहित्यक भक्ति परंपरा के प्रमुखस्तंभ मे एक आओर मैथिली के सर्वोपरि कवि मानल जाइत अछि.. मिथिलाक लोकनि के'देसिल बयना सबजन मिट्ठा' सूत्र उत्तरी-बिहार में लोकभाषाक जनचेतना जागृत कएलाह..लोकव्यवहार में आइओ हुनकरचनाक प्रयोग होयत अछि...महाकवि विद्यापति संस्कृत, अबहट्ठ, मैथिली भाषाक प्रकाण्ड विद्वान छलाहकरीब 5 करोड़ लोक मैथिली के मातृ-भाषा के रुप में प्रयोग करैत छथिन्ह...मैथिली साहित्यक अपन समृद्ध इतिहासरहल अछि..विद्यापति के मैथिली साहित्य में सबसे ऊँच स्थान प्राप्त छैन.. डा. हरिमोहन झा .. नागार्जुन मैथिलीकप्रमुख लेखक छैथि...२००३ में मैथिली के भारतीय संविधानक आठम अनुसूची में शामिल कएल गेल अछि...

2 comments:

  1. अगले लेखों का इंतजार रहेगा.

    आज पहली बार आपके चिट्ठे पर आया एवं आपकी रचनाओं का अस्वादन किया. आप अच्छा लिखते हैं, लेकिन आपकी पोस्टिंग में बहुत समय का अंतराल है. सफल ब्लागिंग के लिये यह जरूरी है कि आप हफ्ते में कम से कम 3 पोस्टिंग करें. अधिकतर सफल चिट्ठाकार हफ्ते में 5 से अधिक पोस्ट करते हैं -- शास्त्री जे सी फिलिप

    मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
    2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!

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  2. फिलिपजी बहुत-बहुत धन्यवाद...आपने उत्साह बढ़ाया..अब नए जोश उत्साह उमंग के साथ पोस्ट करुंगा..असल में दफ्तर से आने के बाद कंप्यूटर पर बैठने के बजाय परिवार के साथ ज्यादा समय देना पसंद करता हूं,..लेकिन अब दूंगा..धन्यवाद

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